Tuesday, November 12, 2019

الاتفاق النووي الإيراني: طهران تعلن عزمها استئناف تخصيب اليورانيوم في مفاعل فردو

أعلن الرئيس الإيراني، حسن روحاني، أن بلاده ستستأنف تخصيب اليورانيوم في مفاعل فردو، الواقع جنوب طهران، في أحدث خطوة تتراجع فيها طهران عن التزاماتها بالاتفاق النووي الذي وقعته مع القوى الكبرى في 2015.

وقال روحاني إن طهران ستبدأ بضخ الغاز إلى أجهزة الطرد المركزي الموجودة في مفاعل فردو، الأربعاء، وهو اليوم الأخير من مهلة الشهرين التي منحتها إيران للأطراف الموقعة على الاتفاق النووي للالتزام بتعهداتها.

وكان تعليق جميع أنشطة التخصيب في هذا المفاعل، ومنع تخصيب اليورانيوم فيه حتى عام 2031، أحد الشروط التي فرضها الاتفاق وقبلتها إيران مقابل رفع العقوبات الدولية عنها.

وأضاف روحاني، في كلمة ألقاها الثلاثاء وبثها التلفزيون الرسمي على هامش افتتاح أحد المصانع، أن طهران تعلن ذلك مسبقا للدول الصديقة لها في العالم، وأن "نشاطاتنا النووية الجديدة تتم بإشراف ومراقبة الوكالة الدولية للطاقة الذرية، حتى النشاط الذي سنبدأه غدا"، بحسب ما أوردته وكالة إرنا الرسمية.

قال روحاني: "خطوتنا الرابعة، مثل الخطوات الثلاث الأخرى، يمكن العودة عنها، حينما تنفذ الأطراف الأخرى الموقعة على الاتفاق النووي التزاماتها كاملة".

وأكد أنه "لا يمكننا الوفاء بالتزاماتنا من جانب واحد، بينما الأطراف الأخرى الموقعة على الاتفاق لا تفي بالتزاماتها".

وأوضح أن لدى إيران في مفاعل فردو "ألف و44 جهازا للطرد المركزي، كان من المفترض، وفقا للاتفاق النووي، أن تدور (تلك الأجهزة) فيه دون ضخ الغاز فيها، اليوم سوف أطلب من منظمة الطاقة الذرية أن تبدأ بضخ الغاز في هذه الأجهزة".

وأشار روحاني إلى وجود مفاوضات بين بلاده والقوى الكبرى، لكنها لم تنجح.

وقال: "في الأسابيع الأخيرة، كانت هناك قضايا لم نتفق عليها، لذلك سنتخذ بالتأكيد الخطوة الرابعة غدا، لكن لدينا فرصة للتفاوض مرة أخرى في الشهرين المقبلين، وسوف نتفاوض مرة أخرى".

وأكد الرئيس الإيراني: "إذا وجدنا الحل المناسب لرفع العقوبات، وتمكنا من بيع نفطنا بسهولة، واستخدام الأموال في البنك، ورفع العقوبات الأخرى على التأمين والمعادن، فسنعود إلى الوضع السابق".

وأكد روحاني أن جميع الخطوات التي اتخذتها إيران لتقليص التزاماتها بموجب الاتفاق النووي يمكن العدول عنها، وستفي إيران بجميع التزاماتها بموجب الاتفاق عندما يلتزم بذلك بقية الموقعين عليه.

وكانت الولايات المتحدة قد انسحبت من الاتفاق في مايو/أيار من العام الماضي، وأعادت فرض عقوبات على إيران لشل اقتصادها. وردت طهران بتعليق بعض التزاماتها في مايو/ أيار هذا العام. وقالت إنها ستواصل هذه العملية تدريجيا طالما "لم تف" الأطراف الأخرى بالتزاماتها.

عبرت روسيا الثلاثاء عن القلق بشأن قرار طهران استئناف تخصيب اليورانيوم في مفاعل فردو.

وقال ديمتري بيسكوف، المتحدث باسم الرئيس الروسي، فلاديمير بوتين، للصحفيين: "نراقب تطور الوضع بقلق. إن انهيار الاتفاق لا يبشر بخير. ونحن نؤيد الحفاظ عليه".

وقال بيسكوف إن روسيا، في الوقت نفسه، تتفهم مخاوف طهران بشأن "العقوبات غير القانونية وغير المسبوقة" المفروضة عليها.

وحثت فرنسا إيران على التراجع عن قرارها.

وقالت المفوضية الأوروبية إن في قرار استئناف تخصيب اليورانيوم الجديد مخاطرة بالاتفاق النووي.

وقالت متحدثة باسم المفوضية "نحض إيران على التراجع عن جميع الأنشطة غير المتسقة مع التزاماتها بالاتفاق النووي".

Wednesday, October 30, 2019

لغز الهيكل العظمي الغامض الذي تنافس عليه النازيون والسوفييت

على مدار عقود، اجتهد علماء الآثار لتفسير هوية هيكل عظمي يعود للقرن العاشر الميلادي، واكتُشف في قلعة براغ، ونسبه النازيون والسوفييت لأنفسهم لأغراض أيديولوجية.

لكن محاولات تحديد الهوية العرقية لهذه الجثة، التي يبلغ عمرها حوالي ألف عام، تشي بالكثير عنا أكثر من صاحب الجثة.

يرقد الهيكل العظمي ورأسه باتجاه اليسار، وتستقر يده اليمنى على سيف حديدي. وبجانب يده اليسرى يوجد سكينان، ووجهت أصابعه تجاههما وكأنه يحاول لمسهما.

وعند الكوع، يظهر ما يرجح أنها شفرة، بجانب قطعة معدنية كانت تستخدم لإشعال النار في العصور الوسطى، والتي كانت تستخدم في حقيقة الأمر للدلالة على مكانة من يحملها.

وعند قدميه ثمة بقايا إناء خشبي صغير، يشبه أواني الشراب الاحتفالية التي استخدمها الفايكينغ، ورأس بلطة حديدية.

لكن أكثر ما يلفت النظر هو السيف الحديدي الراقد بجانب هذا المقاتل. ويقل طول السيف عن متر واحد ببضعه سنتيمترات، لكنه رمز للقوة والجمال رغم تعرضه لحوالي عشرة قرون من التآكل.

هل كان من الفايكينغ؟

ويقول البروفيسور جان فروليك، عالم الآثار بالأكاديمية التشيكية للعلوم، إن السيف "ذو جودة عالية، ويُرجح أنه صُنع في غرب أوروبا."

واستخدم الفايكينغ هذا النوع من السيوف في شمال أوروبا، والمنطقة التي أصبحت ألمانيا اليوم، وانجلترا، ووسط أوروبا، وغيرهم.

وأضاف فروليك: "لذا، فإن أغلب الأدوات الراقدة بجانب هذا الهيكل تنتمي لعصر الفايكينغ، أو تشبهه. لكن جنسيته ما زالت محل تساؤل".

واستمر هذا السؤال يؤرق المؤرخين منذ اكتشاف الهيكل العظمي في قلعة براغ، على يد عالم الآثار الأوكراني إيفان بوركوفسكي عام 1928.

كان بوركوفسكي لاجئا فارا من الحرب الأهلية الروسية، وربما كان هو المسؤول عن عمليات الحفر الأثرية. لكن كونه مجرد مساعد لرئيس قسم الآثار بالمتحف الوطني في براغ، مُنع من نشر استنتاجاته الخاصة.

كيف تلاعب النازيون والسوفييت بالهيكل؟

عندما احتل النازيون براغ عام 1939، تمسكوا بنظرية الفايكينغ كونها تتسق مع السردية الألمانية بالنقاء العرقي.

وكان الفايكينغ من عرقيات الشمال، وبالتالي من قبائل الجِرمان. وبالنسبة للمحتلين، كانت هذه طريقة سهلة للدمج والدعاية، إذ أنها تعزز فكرة هتلر عن عودة العرق الألماني لاستعادة السيطرة على الأراضي القديمة باعتبارها من حقهم.

وتوالت الضغوط على بوركوفسكي لاحقا لخدمة الأكاديمية النازية، تحت تهديدات باعتقاله في معسكرات النازية. ونُشرت استنتاجاته بعد الكثير من التنقيح لتتناسب مع الادعاءات التاريخية الألمانية.

وفور انتهاء الحرب، وزيادة النفوذ الروسي الذي اتخذ سمة قمعية في براغ بشكل غير مسبوق، أُجبر بوركوفسكي على التراجع عما نُسب إليه تماما، مشيرا إلى أنه تعرض لضغط كي يتلاعب بفكرة الفايكينغ.

واسترجع بوركوفسكي التفسير الأقدم الذي خرج به مديره السابق، بأن الهيكل العظمي يرجع لشخص هام من سلالة البريمسلايد السلافية الأوائل، الذي حكموا بوهيميا لأكثر من 400 عام حتى 1306.

وفي هذه المرة كان استنتاجه تحت تهديد جديد هو السجن في معسكرات الغولاغ الروسية.

من أين ينحدر الرجل؟
واليوم، بعد مرور 70 عاما، أصبح من حق الأثريين مثل بروفيسور فروليك التوصل إلى استنتاجات يدعمها العلم، وليس التوجه الأيديولوجي.

ويقول فروليك: "نحن متأكدون من أنه لم يولد في بوهيميا"، داعما ذلك بتحليل نظائر عنصر سترونتيوم المشع الموجودة في أسنان الهيكل، والتي أثبتت أنه نشأ في شمال أوروبا "على الأرجح في مكان ما على الساحل الجنوبي لبحر البلطيق، أو ربما في الدنمارك".

فهل هذه إحدى البقاع التي سكنها الفايكينغ؟

"هذا صحيح، لكن كونه ولد في منطقة البلطيق لا يعني بالضرورة أنه من الفايكينغ. فمنطقة الساحل الجنوبي للبلطيق سكنها في هذه الفترة قبائل سلافية، وبلطيقية وغيرهم".

ويرى فروليك أن هذا المقاتل الذي ولد في الشمال، وتوفي لأسباب غير معروفة وهو في سن الخمسين تقريبا، أتى إلى براغ في سنوات شبابه الأولى لينضم إلى حاشية بوريفوج الأول، أول دوق لبوهيميا والذي تنحدر منه سلالة بريميسلايد، أو ربما ابنه الأكبر ووريثه سبايتينيف الأول.

Monday, September 16, 2019

Назван уровень дохода, позволяющий россиянам скопить деньги

Эксперты подсчитали комфортный для россиян уровень дохода, начиная с которого можно начинать откладывать средства. Об этом пишет РБК со ссылкой на результаты исследования, которое провели СК «Росгосстрах Жизнь» и банк «Открытие».

В ходе опроса выяснилось, что наши соотечественники готовы начинать копить при уровне дохода от 35 тысяч рублей на одного члена семьи. Это больше дохода среднего россиянина. При этом большинство россиян (59 процентов) вообще не имеют никаких «заначек».

Из тех, кто все-таки сберегает, 32 процента делают это нерегулярно (например, после продажи имущества или получения наследства). Остальные 58 процентов откладывают деньги с зарплаты, около 10 процентов – с премии.

Среди тех, кто не делает сбережений, почти треть заявили, что нуждаются в доходе от 45 тысяч до 55 тысяч рублей на члена семьи, чтобы начать откладывать средства. Чуть меньше – 21 процент – начнут копить деньги только при зарплате в 55 тысяч рублей. 17 процентов опрошенных сообщили, что готовы начать делать сбережения при доходе 35-45 тысяч рублей.

По итогам 2018 года среднедушевой доход россиян составил 33 тысячи рублей в месяц. При этом реальные располагаемые доходы наших соотечественников (доходы за вычетом обязательных платежей) непрерывно падали с 2014 по 2017 год.

Так вице-президент «Деловой России» Николай Остарков сообщил, что хорошей площадкой для эксперимента по сокращению рабочей недели могут стать государственные органы в связи с тем, что именно в этой сфере процессы организации труда зачастую являются неэффективными.

Ранее премьер-министр России Дмитрий Медведев поручил Минтруду представить в правительство свою позицию по вопросам возможности введения четырёхдневной рабочей недели. Сделать это сотрудники ведомства должны до 30 сентября. Ряд высокопоставленных чиновников уже прокомментировали эту инициативу. В частности, российский омбудсмен Татьяна Москалькова полагает, что сокращение рабочей недели можно внедрить в стране только с помощью специальных исследований. Эксперты отмечают, что введение четырёхдневной рабочей недели может поспособствовать падению ВВП приблизительно на 20%.

Tuesday, August 27, 2019

Светлана Лобода умоляла Крутого избавить ее от исполнения песни Пугачевой

Не оставляло ощущение, что все это было уже не раз. Но как избежать 65-летия «народного русского композитора» (как он представил сам себя на пресс-конференции) и народного артиста Игоря Крутого? В багаже жизни и творческих достижений был уже не один юбилей маэстро. Видимо, и в этом кроется одна из причин дежавю. Нынешний год — очередной юбилей (отмеченный мэтром еще летом), а сцена конкурса «Новая волна», что ясно без дополнительных пояснений, — «профильная» площадка, где не отметить такое событие означало бы неслыханное богохульство…

Вечера Крутого — идеальное поле для артистических амбиций. Звезды получают в свое распоряжение бессмертные хиты, уже несколько десятилетий невероятно точным образом отражающие музыкальные запросы российского музменталитета, и самого композитора за роялем как признак суперстатуса всего происходящего. Казалось бы, вот он — шанс мечты. Но на деле не все так просто.

Так уж получилось, что Игорь Яковлевич обеспечил важной частью репертуара сливки нашего музистеблишмента, включая саму Примадонну. А так как присутствие Аллы (Пугачевой) в нашей муздействительноси давно уже сродни полтергейсту — вроде ее нет, но она тем не менее повсюду — то неудивительно, что ее тень и в этот раз сразу возникла уже в начале концерта, когда Филипп Киркоров исполнил «Тысячу лет», и так и осталась витать над залом. Выдать свою версию пугачевского хита для многих артистов стало желанным приключением, несмотря на то, что всегда есть риск опозориться на всю округу.

На вечере композитора-юбиляра в эту опасную воду вошли уже упомянутый Филипп Киркоров (в его версии получился не столько прочувствованный кавер, сколько караоке от преданного фаната и бывшего мужа), Димаш Кудайберген («Любовь, похожая на сон» изначально была песней женщины, у которой все сложно, а Димаш сделал еще сложнее, благо его визжавшие от восторга китайские поклонницы ничего не поняли) и Светлана Лобода, которой досталась «Живи спокойно, страна».

Поначалу поп-диве хотелось исключительно посочувствовать. «Живи спокойно, страна» — песня для Пугачевой и про саму Пугачеву. В принципе, таких песен у Аллы не одна, но эта скроена по исключительно уникальному лекалу — только для хозяйки! Переделка такого «платья» под другую фигуру сродни чистому безумию. Не менее безумным было бы намерение прожить по-пугачевски жизнь в песне — актерских способностей Лободы вряд ли хватило бы для изображения одного лишь взмаха ресниц Примадонны. Но Лобода ничем этим и не занималась. Ее аранжировщики упаковали ретрохит в упругий хаус и превратили социальный фельетон в танцевальную бомбу. И вот здесь Лобода разгулялась и прекрасно сыграла саму себя, то есть длинноногую девицу, которая прикольно пляшет и не особо парится на предмет сложных содержательно-драматургических концепций. В ходе концерта такой же фокус пытались повторить Artik & Asti с «Где же ты» и Алексей Воробьев с «Мадонной». Но их примодненные стратегии развалились, даже не успев собраться во что-то мало-мальски вразумительное.

Tuesday, August 20, 2019

香港警察:两名警员因涉嫌“滥用私刑”被捕

香港民主党周二(20日)在记者会上展示片段,显示有穿着制服的警员在医院虐打和凌辱一名被捕男子。

香港警方其后证实,已经拘捕两名警员,涉嫌袭击致伤罪。警方强调高度关注事件,认为事态严重,重申不会姑息警队暴力行为。

香港民主党表示,事主是62岁的上水市民钟先生,他在6月25日晚因醉酒与人争执,其后被指涉嫌袭警被捕,并被送去北区医院独立病房。

民主党表示,视频是依《个人资料(私隐)条例》从医院管理局获得,钟先生遭受两次分别历时7分钟及6分钟的“私刑”,形容这种做法犹如“十大酷刑”,“情节极之严重”,并转述事主及家人的话,指当时的警员说“黑警就是这样做事”,警告事主,“我会搞你老婆和你家人”。

视频显示拍摄日期为6月26日凌晨2时许,事主四肢被绑在病床上,两名身穿警察制服的人进入病房,用电筒直照事主眼睛,多次拍打他脸部,拗其手腕,攻击其腹部及下体。在场另一疑似便装警员并没有阻止。事主看来曾挣扎和想呼叫,但被疑似警员掩盖事主口鼻。

民主党立法会议员林卓廷表示,“有关行为令人震惊及发指,为警队的败类,涉嫌酷刑罪,罪行极之严重,可被判终身监禁”,而在场疑似便衣警员没有制止,也涉嫌公职人员行为失当罪,要求警务处处长尽快把警员停职和展开刑事调查。

早前,多名被捕的“反送中”示威者及相关律师曾公开指控警方对待示威者不合规。 但香港警方当时回应称,充分保障被捕人士的权利,被捕人士亦可随时投诉。

林卓廷指,近月警民关系极为紧张,此次事件令人担心警员向被捕人士施虐“非单一事件”,而“警察针对被捕示威者的暴力更不敢想象”,要求警队关注执勤人员的精神状态和心理健康,防止滥权施虐恶行再现。

钟先生的家属在民主党的记者会上说,他的父亲曾受警方恐吓,当时的警员称“会搞你老婆和家人”,令家人饱受精神压力,而且警方会带手套进行“私刑”,“看似手法纯熟,早有预谋”。他称事后,其父身体多处有瘀伤,下体感到痛楚,右手无名指指筋断裂,需戴上固定器。

Friday, August 9, 2019

不想得罪美国和伊朗,日本苦思折中方案应对护航联盟

  中新网8月9日电 据日本共同社8日报道,有关围绕中东霍尔木兹海峡的有意愿国家联盟构想,日本政府内部出现了避开与伊朗相邻的波斯湾,而向距离其约2200公里以外的阿拉伯半岛南部也门近海派遣自卫队的方案。考虑到“转用”在该海域附近为打击海盗开展活动的海上自卫队P-3C巡逻机等,暂不加入意愿联盟而由日本单独派遣也被纳入视野。多名政府消息人士8日透露了上述消息。

  分析称,为了维持与伊朗的友好关系而把派遣地定在相距较远处,这是波斯湾以外区域派遣方案出现的背景之一。也门近海在美方给出的意愿联盟“作战行动”范围内。据称,日方在被指“不能什么都不做”的情况下,也是认为这样容易得到美伊双方的理解。

  日本首相安倍晋三打算在本月下旬出席七国集团(G7)峰会之际与美国总统特朗普举行磋商。有意见指出,与其加入可能受伊朗敌视的意愿联盟,日本采取单独行动方为上策。最终还将在看清欧洲等各国动向后敲定对策。

  日本政府设想的活动内容为通过也门近海的护卫舰和P-3C巡逻机执行情报收集和警戒监视任务。目前尚未考虑通过新法,将继续慎重探讨能否以《自卫队法》的“海上警备行动”、《海盗应对法》的“海盗应对行动”以及《防卫省设置法》的“调查与研究”作为法律依据。

  活动区域为阿拉伯半岛与非洲东部吉布提等之间的曼德海峡附近。这是连接红海与亚丁湾的区域,有来自沙特阿拉伯的油轮等通行。美国中央司令部制定的“哨兵行动”把此处与霍尔木兹海峡、波斯湾、阿曼湾一同划入活动范围。

  除在波罗的海上空进行跟踪拦截,英国国防部在公告中称,同一天英国空军台风战斗机还从苏格兰洛西茅斯空军基地升空,对两架迫近英国领空的俄罗斯海上巡逻机进行跟踪拦截,期间无意外发生,俄军巡逻机未进入英国领空。(完)

  “海军上将马奎尔在军队中有着悠久而卓越的职业生涯,2010年从美国海军退役。他曾在各层级担任指挥,包括在海军特种部队担任指挥。” 特朗普表示,“他还曾在哈佛大学担任国家安全研究员。我毫不怀疑他会做得很好!”

  报道称,现任国家情报总监丹·科茨将在8月15日离任,马奎尔将接替科茨。特朗普是在美国排名第二的情报官员苏·戈登辞职后不久,宣布的这一消息。

  特朗普此前曾表示,“苏·戈登是一位伟大的专业人士,拥有悠久而卓越的职业生涯”,“苏已经宣布她将于8月15日离开,这与丹·科茨的离任是同一天。一位新的国家情报代理总监将于不久后就被任命。”

  戈登此前担任美国国家情报总监办公室的主要副主任。根据一般程序,在科茨辞职后,戈登将成为代理总监。但美国政府官员此前曾表示,白宫正在审查是否可以合法地选择顺位继任者之外的代理总监。

  特朗普写道:“苏·戈登是一位伟大的专业人士,有着漫长而杰出的职业生涯。”“在过去的两年中,我认识了苏,并对她产生了极大的尊重。苏已经宣布她将于8月15日离开,这一天正好是丹·科茨退休的日子。不久将任命一位新的国家情报局代理总监。”

Wednesday, July 31, 2019

Как в опаснейшей зоне калмыцкой столицы жилой дом строят

До какой «нелепости» доходили наши предки! Мучились, понимаешь ли, над возведением Элисты, расширяли ее, украшали. Благодаря архитекторам 1960-1970-х мы имеем просторные улицы, микрорайоны, парки, бульвары. Чуть позже началась застройка окраин, растянувшихся на многие километры. Словом, город растет и взрослеет, как огромный живой организм, и это нормальный процесс современного общества.

Но в последние годы в самом центре началось насаждение высоток. Извините за банальность, но они растут как грибы после дождя. Вот только что был маленький пятачок – и за какие-то месяцы здесь вдруг поднялась многоэтажка. И не важно, что буквально друг у друга на головах. А кого это пугает, если на кону большие деньги? Ведь, как известно, социального жилья в республике не возводят. А потому все новостройки – это проекты коммерческие. И чтобы поселиться именно в самом центре, пипл платит по максимуму.

Трещины у соседей

Одним весенним недобрым утром жители улицы Гагарина вдруг проснулись от шума экскаваторов. На соседнем квадрате, где буквально яблоку негде упасть, началось рытье котлована. Стоит отметить, что место это довольно глухое, сразу за Национальной библиотекой имени А. Амур-Санана и сравнительно новой многоэтажкой, что «смотрит» на здание Министерства внутренних дел РК.

По отзывам старожилов, здесь ранее находились мастерские и общежитие Калмыцкого ТЮЗа. Театра давно нет, а территория, по всему, осталась за актерским сообществом, поскольку табличка на стройке гласит: будущий семиэтажный 56-квартирный дом по улице Гагарина, 16-а, возводит ООО «Стройинвест» (руководитель Евгений Цекиров) по заказу ЖСК «Театральный» (председатель Павел Челбанов).

Дело, конечно, хорошее, нужное, да вот незадача. Место выбрано уж больно специфическое. Во-первых, не развернуться даже строительной технике, поскольку подъездов практически нет. Во-вторых, при начале работ раскурочили и варварски покорежили забор и ворота соседей, и на стенах их частного дома пошли даже трещины. В-третьих, как выяснила проверка Инспекции Гостройнадзора, разрешения на строительство капитального объекта по этому адресу не выдавалось. В-четвертых, что очень важно: огромная высотка станет бок о бок соседствовать с трансформаторной подстанцией, то есть уже априори находится в зоне охранных объектов электросетевого хозяйства, а это строжайше запрещено, поскольку опасно.

Wednesday, July 24, 2019

40 लाख टन चीनी के बफर स्टॉक का प्रस्ताव मंजूर, गन्ने का एफआरपी 275 रुपए बरकरार

नई दिल्ली. सरकार ने चीनी सेक्टर को राहत देते हुए दो प्रस्तावों को मंजूरी दी है। आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीईए) ने 40 लाख टन चीनी का बफर स्टॉक बनाने के प्रस्ताव को बुधवार को मंजूरी दे दी। इस पर 1,674 करोड़ रुपए का खर्च आने की उम्मीद है। बफर स्टॉक से चीनी मिलों को गन्ना किसानों के 15,000 करोड़ रुपए से ज्याादा बकाया चुकाने में मदद मिलेगी।

2019-20 मार्केटिंग ईयर (अक्टूबर-सितंबर) के लिए गन्ने का एफआरपी 275 रुपए प्रति क्विंटल ही रखा है। पिछले साल भी यही कीमत थी। एफआरपी वह न्यूनतम कीमत है जिस पर चीनी मिलों को किसानों से गन्ने की खरीद करनी होती है।

पिछले साल अगस्त में सरकार ने 1,175 करोड़ रुपए खर्च कर 30 लाख टन चीनी का बफर स्टॉक बनाया था। ताकि, चीनी मिलों का नकदी संकट सुलझ सके और वे किसानों का बकाया चुका पाएं। 

मौजूदा मार्केटिंग ईयर 2018-19 (अक्टूबर-सितंबर) में 3.29 करोड़ टन चीनी के उत्पादन की उम्मीद है जबकि, देश में सालाना मांग सिर्फ 2.6 करोड़ टन की है।

पत्र में लिखा गया-  इन घटनाओं को गैर-जमानती अपराध घोषित करते हुए तत्काल सजा सुनाई जानी चाहिए। यदि हत्या के मामले में बिना पैरोल के मौत की सजा सुनाई जाती है तो फिर लिंचिंग के लिए क्यों नहीं? यह ज्यादा जघन्य अपराध है। नागरिकों को डर के साए में नहीं जीना चाहिए।

"जय श्री राम" एक हथियार बन गया- पत्र
उन्होंने लिखा- इन दिनों "जय श्री राम" एक हथियार बन गया है। इसके नाम पर मॉब लिंचिंग की घटनाएं हो रही हैं। यह चौंकाने वाली बात है। अधिकांश हिंसक घटनाएं धर्म के नाम पर हो रही है। यह मध्य युग नहीं है। भारत में राम का नाम कई लोगों के लिए पवित्र है। इसको अपवित्र करने के प्रयास रोके जाने चाहिए।

पत्र के अनुसार- सरकार के विरोध के नाम पर लोगों को 'राष्ट्र-विरोधी' या 'शहरी नक्सल' नहीं कहा जाना चाहिए और न ही उनका विरोध करना चाहिए। अनुच्छेद 19 अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करता है। असहमति जताना इसका ही एक भाग है।

Thursday, July 11, 2019

台湾大选:蔡英文竞选搭档候选人说港台正筑起一道抗拒北京的“无形高墙”

台湾总统大选在即,外界关注总统蔡英文将谁与搭档竞选。蔡英文竞选搭档的热门竞争者之一、台湾桃园市长郑文灿再度访美参加一系列活动。

被记者问到会否答应担任蔡英文的副手时,郑文灿表示:“这个事情(竞选邀请)没有发生。”他称会支持并尊重蔡英文选择的副手。

在四个月内第二度访美的郑文灿,恰逢蔡英文同时过境美国。即将访问中美洲的蔡英文11日在纽约过境,郑文灿亦将从华府抵达纽约。关于两人会否“同框”,郑称蔡的行程应由总统发言人表述,而他本人在纽约没有公开行程。

郑文灿10日在华盛顿智库威尔逊中心发表演说,他表示香港的“反送中”运动是其历史发展的重要转折点,在台湾则形成“挺台湾,保香港”的气氛。经此一役,香港和台湾民心中筑起一道抗拒北京的“无形高墙”。

郑文灿说,对香港人而言,一国两制已经破产,“两制是假象,一国才是真实的”。而一国两制在台湾“完全没有市场”。他认为,亲中路线在台湾走到十字路口,“一中各表”再没有各说各话的空间 ,因为在北京的眼中“没有各表,只有一个中国。”希望台湾跟中国进一步经济整合、与北京沟通以降低国防支出、降温外交竞争的策略在台湾失去支持。

郑文灿3月曾会晤美国白宫、国防部及国务院官员,他透露此程亦会拜会美方官员与议员。除此以外,他将以桃园市长身份参加美国商务部举办的全球城市挑战会议。他对BBC表示,他期待向美方介绍美中贸易战中“台商回流”的现象。

但实际上,他以“中国威胁”开篇,论述美中角力之间台湾的经济策略、两岸政策与台湾在美国印太战略中的角色。演讲远远超越了市长视角,甚至带着总统的格局。

近期民调显示,台湾六都市长之中,郑文灿的施政满意度最高,达70%。鉴于郑的高声望,桃园市长很可能不会是他政治生涯的最高峰。

围绕2020年大选民进党“蔡郑配”的揣测不断,郑文灿近期曾笑说:“我姓郑(正)当副的不太好。”被问到是否有意参加2024年总统大选时,郑文灿也巧妙回答:“妈祖还没给我报梦”,暗讽了正在竞选的郭台铭。

郑文灿认为,台湾可掌握美中贸易战带来的机遇。贸易战正酣,台商正寻找新的生产基地。在鼓励回台投资的政策下,回流台商的投资总额预估达200至250亿美元,其中以制造和电子业回流现象显著。

他表示,今年上半年,从美国直接下单到台湾的电子产品,增加约20%,相较之下,台湾出口到中国大陆的同类产品下降15%。

郑文灿称,他希望借演讲为台湾争取美国更有力的支持。“走在自由的道路上,需要勇气、智慧,和朋友的支持,”他说,台湾和美国虽然使用的语言不同,但享有共同的价值。“台湾的企业保护智慧财产权(知识产权),这跟中国是不太一样的。”

以民主自由价值观作为美台伙伴关系的联结,是台湾政治人物访美时常见的论述。但郑文灿对于美中贸易战中台湾角色的表述,与另外两位来自台湾的市长明显区别。

台北市长柯文哲今年3月访美时对BBC表示,台湾应寻求“亲美友中”,在美中冲突中持谨慎态度。“台湾自己要小心,美中对抗是一个局面,台湾应该想自己如何survive(存活),而不是想如何leverage(以小搏大)。”

参选总统呼声颇高的高雄市长韩国瑜曾有类似表态,指美中贸易战是“大人在打架,小孩要闪远一点”,认为台湾不该卷入。

Thursday, July 4, 2019

Führende Scientologen gehören zu den aktivsten Immobilienplayern der Stadt

Die Scientology-nahe Swiss Immo Trust AG aus Kaiseraugst ist eine wichtige Akteurin auf dem Basler Immobilienmarkt. Dabei geht die Firma nicht gerade zimperlich vor.

Ein Firmengeflecht rund um die Swiss Immo Trust AG in Kaiseraugst war massgeblich an der Finanzierung der Scientology-Zentrale am Rande Basels beteiligt. Recherchen der TagesWoche zeigten, wie führende Personen in diesen Firmen mit ihren namhaften Spenden einen Grossteil des Sektentempels an der Burgfelderstrasse finanzierten.

Doch nicht nur innerhalb des Basler Ablegers von Scientology ist dieses Unternehmen eine relevante Grösse. Wie unsere Datenauswertung zeigt, gehört die Swiss Immo Trust zu den wichtigsten Akteuren im Geschäft der Umwandlung von Mietwohnungen in Stockwerkeigentum.

Die TagesWoche hat die im Kantonsblatt publizierten Handänderungen auf dem Basler Immobilienmarkt seit Mitte 2008 ausgewertet. Eine solche Transaktion beschreibt den Verkauf einer Immobilie. Naturgemäss geschieht dies bei der Umwandlung in Stockwerkeigentum in relativ kurzer Zeit gleich mehrfach. Ein Unternehmen kauft eine Liegenschaft auf, renoviert oder baut neu und bringt die Wohnungen daraufhin einzeln auf den Markt. Statt einem einzelnen Eigentümer gibt es nun viele verschiedene.

Umstrittenes Business
Dieses Business gilt deshalb als umstritten, weil dadurch sehr oft günstiger Wohnraum verloren geht. Bevor die Umwandlung in Wohneigentum möglich ist, müssen die bisherigen Mieter nämlich weichen.

Zwischen 2010 und 2014 war die Swiss Immo Trust an über 50 solcher Handänderungen beteiligt. Bei 43 davon ging es um Stockwerkeigentum, verteilt auf insgesamt fünf Bauprojekte. Die Liegenschaften befinden sich allesamt im Gebiet zwischen Schützenmatt- und Kannenfeldpark. Bei all diesen Projekten immer mit dabei: Rudolf Flösser, leitender Direktor von Scientology Basel.

Grösstes Projekt war die Überbauung zwischen der Türkheimerstrasse und dem Spalenring. Dort kaufte die Swiss Immo Trust zwei ältere Liegenschaften auf, um sie durch einen Neubau mit 21 Eigentumswohnungen zu ersetzen.

Das Projekt an der Türkheimerstrasse wurde von der
BW-Liegenschaftsverwaltung geleitet, die sich ebenfalls in den Händen einer Scientologin befindet.

Dies Leitung dieses Projekts oblag der BW-Liegenschaftsverwaltung GmbH, einer Firma von Brigitte Widmer – Scientologin und potente Spenderin für den Bau der Sektenzentrale. Die Wohnungen waren zuvor sehr günstig, eine 3-Zimmer-Wohnung kostete weniger als 1000 Franken.

Das Geschäft ging nicht reibungslos über die Bühne, weil sich einige der verbliebenen Mieter gegen ihre Kündigungen wehrten. Darunter zwei Gewerbler, eine Druckerei und ein Malergeschäft. Diese suchten Hilfe beim Mieterverband und erhoben Einsprache.

Eine erste Kündigung, ausgesprochen durch die Firma BW-Immobilientreuhand, ebenfalls aus dem Umkreis der Scientology, erfolgte zur Unzeit und wurde deshalb für ungültig erklärt. Das Bauprojekt in seiner ersten Version (hauptsächlich 1- und 2-Zimmer-Wohnungen) hielt der gerichtlichen Prüfung ebenso wenig stand und wurde für untauglich befunden. Die Mieter durften ein Jahr länger bleiben.

Nachträgliche Kosten
Unangenehm aufgefallen ist die Swiss Immo Trust auch auf dem Land. 2008 berichtete etwa der «Blick» von einer Überbauung in Therwil. Dort wurde sämtlichen 28 Mietparteien wegen Sanierungsbedarf gekündigt – ihre Wohnungen wurden danach während der Euro 08 aber für mehr als 400 Franken pro Tag an Fussballfans zwischenvermietet.

In einem anderen Fall in Oberwil kam es zwischen dem Unternehmen und
26 Käuferparteien von Eigentumswohnungen zu einem Streit wegen einer Rechnung von 600’000 Franken. Die Swiss Immo Trust wollte diese Anschlussgebühr für Wasser und Kanalisation nachträglich auf die Käufer überwälzen.

Diese gingen jedoch davon aus, dass diese Gebühren bereits im Kaufpreis enthalten gewesen waren. Erst nachdem wiederum die BaZ recherchiert hatte, zeigte sich die Swiss Immo Trust einsichtig und verzichtete auf die Forderung.

Tuesday, June 25, 2019

Внутренняя борьба под видом внешней? В чем причина беспорядков в Грузии

В конце прошлой недели политическая ситуация в Грузии резко обострилась. Причиной взрыва недовольства стало появление российского депутата в кресле председателя грузинского парламента. Но есть предположение, что действия российского чиновника были лишь поводом, а истинные предпосылки к волнениям назрели давно.

В чем причина повышения градуса политической борьбы в Грузии?

Чья рука - Москвы или Иванишвили?
20 июня несколько тысяч человек вышли к зданию грузинского парламента. Многие выкрикивали антироссийские лозунги и обвиняли Москву в ползучей оккупации Грузии. Но при этом требования собравшихся были по большей части внутриполитическими.

"Эпизод с российским депутатом - это лишь символический момент. Подозрения к правящей партии и недовольство властью бытовали уже давно. Просто сейчас они материализовались в протесты", - отмечает в интервью Би-би-си грузинский политолог Гия Нодия.

С 2012 года правящей партией в Грузии является "Грузинская мечта". Она была создана и принадлежит миллиардеру Бидзине Иванишвили.

Иванишвили не занимает никаких государственных постов, но многие называют его самым влиятельным человеком в Грузии.

"В России я провел лучшие 20 лет своей жизни", - сказал однажды бизнесмен в интервью Русской службе Би-би-си.

Биография Иванишвили, его бизнес в России и заявления о необходимости улучшения отношений с Москвой дали оппозиции повод обвинить миллиардера в проведении пророссийской линии в ущерб интересам Грузии. Так ли это?

С тех пор как партия Иванишвили пришла к власти, переговоры между Тбилиси и Москвой по ряду направлений перешли в конструктивное русло.

Возобновились регулярные авиаперелеты между странами, экспорт грузинского вина, минеральной воды и фруктов.

Россия облегчила визовый режим для граждан Грузии. А в Грузию хлынул поток российских туристов.

Но принципиальные разногласия так и не были решены. Россия по-прежнему считает Абхазию и Южную Осетию независимыми государствами и по сути призывает Грузию признать статус-кво.

В Тбилиси по-прежнему считают Цхинвали и Сухуми временно оккупированными территориями и надеются вернуть контроль над отколовшимися регионами.

При этом от публичной критики действий Владимира Путина Иванишвили всегда воздерживался.

За годы правления партии Иванишвили в Грузии стало не только много российских туристов, но и появилось немало организаций, продвигающих тему сближения с Россией и отдаления от ЕС и НАТО.

Например, "Общество Ираклия второго", "Фонд Горчакова", Российско-грузинский общественный центр им. Примакова и другие.

По данным соцопросов, уровень доверия к "Грузинской мечте" и Иванишвили постепенно снижается.

"Правящая партия стремительно становится непопулярной в народе, потому что людям кажется, что эти политики равнодушны к интересам обычных людей", - сказал Би-би-си старший аналитик Центра Карнеги Томас де Вааль.

В ноябре 2018 года в Грузии прошли президентские выборы. Голосование было признано легитимным.

Однако многие политологи считают, что Иванишвили активно использовал административный ресурс правящей партии и свое финансовое состояние, чтобы обеспечить победу Саломе Зурабишвили, которую он решил поддержать.

"После последних выборов у многих людей появилось пессимистическое отношение к возможности справедливой политической борьбы и возможности сменить власть через выборы. Все это взорвалось и вылилось в такую акцию", - говорит политолог Нодия.

Сразу после выборов лидер оппозиции Григол Вашадзе заявил Би-би-си, что никогда не признает итоги прошедшего голосования и будет добиваться досрочных выборов в парламент страны.

Дело в том, что "Грузинская мечта" всегда противопоставляла себя бывшему президенту Грузии Михаилу Саакашвили именно в вопросе отношения к митингам.

Многие в Грузии помнят, как подчиненные Саакашвили жестко разгоняли демонстрации 2007 и 2011 годов.

Сторонники Иванишвили часто называли Саакашвили и его режим кровавым и авторитарным и обещали, что при "Грузинской мечте" такого не повториться.

Но в итоге в ходе митинга 20 июня полиция применила слезоточивый газ, водометы и резиновые пули.

240 человек попали в больницы. То есть протест был подавлен не менее жестким методом, чем это делалось при Саакашвили.

Такие действия властей могут существенно подорвать рейтинг правящей партии, уверены эксперты.

Friday, June 14, 2019

Чубайс предложил ввести новый налог - углеродный

Глава «Роснано» Анатолий Чубайс считает, что России надо активнее снижать выбросы в атмосферу. Для чего ввести углеродный налог — на выбросы при производстве, если те не соответствуют определенным нормам по содержанию углекислого газа. Для начала этот налог может быть достаточно символическим. Об этом Чубайс заявил в интервью «РИА-Новости» во время Петербургского экономического форума.

Мотивировка такая. Евросоюз в последние годы принял ряд решений, связанных с выполнением Парижского соглашения по климату (Москва его тоже подписала в 2016 году). И товары, которые поступают в ЕС из других стран и не соответствуют предельным нормам по выбросам углекислого газа при их производстве, будут облагаться дополнительным сбором. Как считает Чубайс, лучше заранее ввести такой налог самим у себя, чтобы стимулировать промышленников снижать выбросы. А то ничего в Европу продавать не сможем.

- Если мы сейчас легко проскочим эту развилку с налогом, считая, что мы всех перехитрили, то через пять-семь-десять лет выяснится, что мы, оказывается, сами себе закрыли экспорт, в том числе экспорт, регулируемый ОПЕК (имеется в виду нефть — Ред.). И это вещь очень болезненная, - утверждает глава «Роснано».

Насколько болезненным вопрос может оказаться с другой стороны — промышленность у нас и без дополнительных экологических налогов переживает не лучшие времена — Анатолий Чубайс не уточнил.

Да и на населении появление такого налога тоже неминуемо скажется. Вспомним, что во Франции углеродный налог стал одной из главных причин протестов «желтых жилетов». Бензин из-за этого сбора неминуемо дорожает. Любые автоперевозки и содержание личного авто — тоже.

- Чубайс у нас отвечает за альтернативную энергетику — использование солнца, ветра и т. п. Поэтому и лоббирует углеродный налог, - говорит Сергей Пикин, директор Фонда энергетического развития. - Этот сбор ухудшает положение тех, кто работает на традиционных энергоносителях — газе, угле и т. п. И делает альтернативные технологии, которые сейчас достаточно дороги, более конкурентоспособными. Если смотреть между строк, в этом и есть главный смысл предложения Чубайса. Остальное его не очень интересует.

А про экономическую войну с традиционными энергоносителями, поставляемыми РФ на международные рынки, - нефтью, газом, углем. Однако очевидная угроза энергетической и экономической безопасности России сторонников Парижского соглашения не останавливает

Thursday, May 30, 2019

江南华南将再次出现较强降雨过程 局地有暴雨

  中新网5月30日电 据中央气象台网站消息,5月30日夜间至6月1日,江南、华南等地将再次出现较强降雨过程,江西中南部、福建中北部、湖南南部、广东北部和西南部、广西南部和北部、云南东南部等地局地有暴雨。

  昨日华南南部出现较强降雨

  昨日,较强降雨主要出现在华南南部,广西东部、广东西部、海南岛等地部分地区降大到暴雨,广东广州、江门、茂名、湛江等局地大暴雨(100~214毫米),上述地区最大小时降雨量40~70毫米。

  江南华南将再次出现较强降雨过程

  5月30日白天,华南地区强降水范围减小,强度减弱,但广西东部、广东西部、海南岛等地的部分地区仍有中到大雨,局地暴雨,上述地区局地伴有短时强降水、雷暴大风等强对流天气。

  5月30日夜间至6月1日,江南、华南等地将再次出现较强降雨过程:江南中南部、华南、云贵高原、四川南部等地的部分地区有中到大雨,江西中南部、福建中北部、湖南南部、广东北部和西南部、广西南部和北部、云南东南部等地局地有暴雨。

  未来三天具体预报

  5月30日08时至5月31日08时,青藏高原大部、内蒙古东部、东北地区北部和东部、西南地区大部、江汉、江淮、江南、华南等地有小到中雨,其中,湖南南部、江西南部、广东中西部、广西东部、云南南部等地局地有大雨或暴雨(50~65毫米),上述地区局地伴有短时强降水、雷暴大风等强对流天气。内蒙古中东部、东北地区中部、陕西北部等地有4~6级风。南疆盆地东部局地有扬沙或浮尘(见图1)。

  5月31日08时至6月1日08时,江南中南部、华南大部、四川西南部、云南南部、海南岛东部、台湾岛等地的部分地区有中到大雨,其中,浙江南部、江西中南部、广西南部和东北部、云南东南部等地局地有暴雨(50~85毫米),上述地区局地伴有短时强降水、雷暴大风等强对流天气。内蒙古、甘肃北部、河套地区等地有4~6级风。南疆盆地东部、内蒙古西部局地有扬沙或浮尘(见图2)。

  6月1日08时至6月2日08时,江南南部、华南大部、云南中东部、黑龙江北部、海南岛、台湾岛等地的部分地区有中到大雨,其中,广西北部和东南部沿海地区、广东北部、湖南南部、福建中部和北部等地局地有暴雨(50~80毫米),上述地区局地伴有短时强降水、雷暴大风等强对流天气。内蒙古、华北北部、甘肃中部等地有4~6级风。南疆盆地东部、内蒙古西部局地有扬沙或浮尘(见图3)。

Wednesday, May 15, 2019

वर्ल्ड कप 2019 में धोनी पर होगा दारोमदार: नज़रिया

क्रिकेट वर्ल्ड कप एक ऐसा त्यौहार है जहाँ पूरी दुनिया से इस खेल के युद्धवीरों का जमघट हर चौथे साल लगता है. पिछले कुछ सालों में वैसे तो क्रिकेट के फॉर्मेट में कई बदलाव आये.

20-20 ने तो इसको खेलने और देखने का तरीका ही बदल दिया लेकिन 50 ओवर वाले वर्ल्ड कप की भारत में अपनी एक अलग जगह और पहचान है और इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है 1983 का वर्ल्ड कप.

1983 वर्ल्ड कप- लॉर्ड्स का वो मैदान जहाँ भारत पहली बार इस महासंग्राम के फाइनल में पहुंचा था और शायद ही किसी ने उस समय सपने में भी सोचा होगा कि वो कप उनके नाम होगा. कपिल देव के सामने वेस्टइंडीज की धुरंधर टीम फिर से इस कप पर कब्ज़ा जमाने की पूरी तैयारी में थी. उस समय कपिल की सेना ने मैदान में ऐसी सर्जिकल स्ट्राइक की जिससे वेस्टइंडीज के सारे दिग्गज धराशायी हो गए. इस वर्ल्ड कप ने हिन्दुस्तानियों का ना सिर्फ़ दिल जीता बल्कि इस खेल को आज जो लोकप्रियता हासिल है, उसकी शुरुआत यहीं से हुई थी.

इस जीत से भारत में कपिल देव रातों-रात स्टार बन गए और उस समय के युवा खिलाडियों को भी इस खेल में करियर की संभावना दिखनी शुरू हो गई. उसके बाद से इस खेल ने भारत को कई स्टार खिलाड़ी दिए. चाहे 90 के दशक के सचिन तेंदुलकर हो या फिर सौरव गांगुली, अनिल कुंबले, युवराज सिंह, महेंद्र सिंह धोनी और अभी के विराट कोहली.

इन नामों में से एक नाम ऐसा है जिस पर हिंदुस्तान के खेल-प्रेमी अटक जाते है वो है धोनी. अटकना स्वाभाविक है और सबसे बड़ी बात यह है कि लोगों ने इसे धोनी युग का नाम दे दिया है, वजह ये है कि भारतीय टीम ने उनकी कप्तानी काल में ऐसे ऐसे कारनामे किए जो कभी पहले हुआ ही नहीं था.

वो ऐसे अकेले कप्तान हैं जिन्होंने भारत को 2007 में हुए पहले टी-20 वर्ल्ड कप में ख़िताब दिलाया, 2011 में कपिल देव के बाद वर्ल्ड कप जीतने वाले दूसरे भारतीय कप्तान बने.

यही नहीं, 2013 में इंग्लैंड में हुए चैंपियंस ट्रॉफी पर कब्ज़ा कर आईसीसी की इन तीनों ट्रॉफियों पर भारत की मुहर लगा दी. इनकी कप्तानी में कोई ऐसी चीज़ बची नहीं चाहे वो टेस्ट हो या फिर कोई और फॉर्मेट. लगातार तीन सालों (2011, 2012 और 2013 ) तक भारत इनकी कप्तानी में आईसीसी टीम ऑफ़ द ईयर का ख़िताब जीतता रहा.

तभी ऑस्ट्रेलियाई खिलाडी मैथ्यू हेडन कहते है "आप धोनी को जानते हैं, वह सिर्फ़ एक खिलाड़ी नहीं है, वह क्रिकेट का एक युग है. कई मायनों में, मुझे लगता है कि एमएस गली क्रिकेट टीम के कप्तान की तरह है, वह हम में से एक हैं, वह टीम के लिए कुछ भी कर सकते हैं.''

2019 वर्ल्ड कप में क्या होगा धोनी का रोल

हो सकता है कि एमएस धोनी का ये आखिरी विश्व कप हो लेकिन इसमें शायद ही किसी को संदेह होगा है कि विकेटकीपर-बल्लेबाज़ धोनी को 2019 वर्ल्ड कप में जगह मिलनी चाहिए या नहीं. उनके बिना भारत के मध्य क्रम के बल्लेबाज़ी अधूरी है. वो अपने बल्ले से ही नहीं बल्कि विकेटों के पीछे भी खेलते हैं और टीम को विकेट दिलाने में उनका अहम रोल होता है.

विराट कोहली की गिनती दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में होती है और अभी भी आईसीसी रैंकिंग में वो अव्वल हैं लेकिन जब कप्तानी की बात आती है तो धोनी उनसे बहुत आगे है.

क्रिकेट विश्लेषक तो ये भी मानते है कि धोनी के बाद किसी को कप्तानी की पूरी समझ है तो वो रोहित शर्मा हैं और उसका सबसे अच्छा उदाहरण है आईपीएल- जहां विराट पूरी तरह से विफल रहे हैं.

खै़र कप्तानी तो विराट के हाथों में ही रहेगी लेकिन अगर आपको सही सलाह देने वाला मिल जाए तो आप टीम को शीर्ष पर ले जा सकते हैं. धोनी, कोहली के अब तक के सर्वश्रेष्ठ सलाहकार रहे हैं, चाहे वो डीआरएस हो या फिर फील्डिंग प्लेसमेंट या गेंदबाजी में बदलाव करना. हर मोर्चे पर धोनी का रोल रहा है और रहेगा. साथ में रोहित जैसे कप्तान का भी टीम में होना भी विराट के लिए फायदेमंद ही साबित होगा.

विकेट के पीछे रहकर जिस तरीके से धोनी ने अब तक डीआरएस वाले मामलों में सफलता हासिल की है वो शायद ही किसी और ने की होगी. वो जिस तरह बिजली की गति से स्टंपिंग करते हैं, वो टीम के लिए बोनस साबित होता रहा है. ऐसे अनुभव के होने से युवा खिलाडियों को भी प्रेरणा मिलती हैं, खासकर ऐसे खिलाड़ी जो पहली बार विश्व कप खेलने जा रहे हों.

हमने धोनी का विकेट-कीपिंग कौशल देखा है, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि विकेट के पीछे से जब वो स्पिनरों का मार्गदर्शन करते हैं और तेज़ गेंदबाजों को स्थिति के मुताबिक बताते हैं कि गेंद कहां डालनी है, सर्कल के अंदर फील्डर्स का समायोजन भी करते है.

विराट, शानदार क्षेत्ररक्षण के कारण उनके लिए लंबे समय तक बाउंड्री लाइन के आसपास फील्डिंग करते है और उनके लिए बैक-वार्ड ,पॉइंट फील्डिंग में बदलाव करना मुश्किल होता है. इस मसले का हल धोनी निकालते है और कोहली के साथ-साथ पूरी तरह से फील्डिंग बदलाव करते रहते है. ऐसा इसलिए भी संभव हो पाता है क्योंकि विराट और धोनी के बीच ट्यूनिंग भी अच्छी है.

Thursday, April 25, 2019

Führende Scientologen gehören zu den aktivsten Immobilienplayern der Stadt

Krach um 600 000 Franken Anschlussgebühren nach BaZ-Recherchen beigelegt – Therwil will Reglement revidieren

Therwil. Es geht um viel Geld, ungenaue Verträge, Reglemente, die willkürlich wirken und am Rande auch um die umstrittene Scientology-Kirche.

Zunächst begann alles in Minne. Die Firma Swiss Immo Trust baute von 2013 bis 2014 an guter Lage in Therwil die schmucke Überbauung Untere Mühle mit 26 Eigentumswohnungen. Doch die Freude an den Eigentumswohnungen verging den Bewohnern in den letzten sechs Monaten – nicht aufgrund der Wohnungen an sich, sondern weil plötzlich Forderungen von insgesamt 600 000 Franken im Raum stehen, mit denen die Stockwerkeigentümer nicht gerechnet haben und die für einige von ihnen kaum aufzubringen sind.

Hickhack um Zahlung
Bei dem Betrag handelt es sich um die Anschlussgebühren an die Kanalisation und Wasserversorgung der Gemeinde Therwil. Für die Stockwerkeigentümer ist klar: Diese Gebühren muss der ehemalige Bauherr Swiss Immo Trust bezahlen, denn die Eigentumswohnungen wurden im Zustand «schlüsselfertig» oder «wie besichtigt» verkauft, was auch ein funktionsfähiges Kanalisationssystem mit einschliesse. Eine Einschätzung, die auf Anfrage der BaZ auch der Advokat und Vizepräsident des Hauseigentümerverbandes Baselland, Alexander Heinzelmann, teilt: «Falls nichts Gegenteiliges im Vertrag oder in zusätzlichen, integrierten Vereinbarungen steht, dürfen die Käufer davon ausgehen, dass die Anschlussgebüren im Kaufpreis inbegriffen sind.»

Die Swiss Immo Trust machte jedoch monatelang keine konkreten Anstalten, die Rechnung der Gemeinde zu übernehmen. Glaubt man Simon von Fürstenhaus*, einem der Eigentümer, macht die Firma im Gegenteil Druck: «Zunächst sagten sie uns, dass sie nicht zahlen. Später hiess es dann, dass sie für einen Deal bereit sind, wenn wir auf unseren Anwalt verzichten. Und zu guter Letzt sind sie zu mir nach Hause gekommen und haben mir angeboten, die Gebühren zu übernehmen, falls ich ihnen ein Darlehen von 200 000 bis 350 000 Franken gebe», sagt von Fürstenhaus.

Die Namen, die von Fürstenhaus in diesem Zusammenhang nennt, sind keine Unbekannten und mit der Scientology-Kirche Basel verbunden. Auch die Swiss Immo Trust taucht auf einer Beobachter-Liste der von aktiven Scientologen geführten Firmen auf. Dies, weil der frühere Verwaltungsrat der Swiss Immo Trust, Rudolf Flösser, leitender Direktor bei Scientology Basel ist. Seine Firma, die Dr. Flösser Treuhand GmbH, hat für das Projekt Untere Mühle auch die Bauherrenberatung übernommen.

«Ich habe an sich nichts gegen Scientology», sagt von Fürstenhaus, der eine Hexenjagd gegen Scientology vermeiden will. Das Verhalten der Swiss Immo Trust in den letzten Monaten findet er trotzdem nicht okay und hat sich deshalb an die BaZ gewandt. Mit Erfolg: Was lange nicht möglich schien, war nach einer Anfrage der BaZ innerhalb eines Tages machbar – die Stockwerkeigentümer haben die schriftliche Bestätigung erhalten, dass Swiss Immo Trust die Gebühren übernimmt.

Christian Varga, Verwaltungsrat der Swiss Immo Trust, bestreitet, dass er die Übernahme der Gebühren je mit der Verleihung eines Darlehens verknüpft hat. Obwohl die Swiss Immo Trust die Gebühren nun übernimmt, ist er nach wie vor der Meinung, dass diese im Preis der Wohnung nicht mit eingeschlossen waren: «Die Kanalisations- und Anschlussbeiträge waren gemäss Vertrag von den Käufern zu tragen. Da jedoch üblicherweise die Kanalisations- und Anschlussbeiträge im Kaufpreis inbegriffen sind, haben wir uns aus Kulanzgründen bereit erklärt, diese Kosten zu übernehmen.» Dies habe er den Käufern im Februar mündlich mitgeteilt: «Wir hätten dies damals schriftlich machen können statt lediglich mündlich, um Klarheit zu schaffen», erklärte Varga.

Unangenehme Situationen
Was Simon von Fürstenhaus fast noch mehr ärgert als das Verhalten von Swiss Immo Trust, ist, dass die Gemeinde die Rechnung, in Kenntnis der Fakten, trotzdem an die Stockwerkeigentümer senden wollte. «Nur aufgrund eines willkürlichen Gummi-Reglements konnte es überhaupt zu dieser unangenehmen Situation kommen.» Das Abwasserreglement der Gemeinde besagt, dass bei Neubauten das Datum der Endschätzung des Gebäudes durch die kantonale Gebäudeversicherung Stichdatum für die Beitragspflicht ist. Auf den Termin der Schätzung haben Gemeinde, Verkäufer und Käufer kaum Einfluss. Im Fall der Unteren Mühle führte dieses Stichdatum dazu, dass die Rechnung trotz schlüsselfertigem Kauf an die Stockwerkeigentümer ging.

«Dieses Reglement ist veraltet, das muss auch die Gemeinde sehen. Sie hätte sich in dieser Angelegenheit auf unsere Seite stellen müssen», sagt von Fürstenhaus enttäuscht.

Laut Gemeindeverwalter Theo Kim muss die Gemeinde die Rechnung dem zum Zeitpunkt der Rechnungsstellung im Grundbuch eingetragenen Eigentümer stellen – ausser der Verkäufer bestätigt der Gemeinde, dass er die Kosten übernimmt, was im Fall von Swiss Immo Trust bisher offenbar nicht der Fall war. Die Schwächen des 25-jährigen Reglements, das ähnlich auch in vielen anderen Gemeinden in Kraft ist, sieht er jedoch auch: «Wir haben bemerkt, dass es in Einzelfällen zu verzwickten und unangenehmen Situationen führen kann.

Es gab auch einen Fall, bei dem Käufer tatsächlich zweimal bezahlen mussten», sagt Kim. Deshalb soll das Reglement noch dieses Jahr revidiert und vor die Gemeindeversammlung gebracht werden: «Darin ist vorgesehen, dass die Rechnung zu einem früheren Zeitpunkt erfolgt, zu dem der Verkäufer im Normalfall noch der Besitzer ist.» Einen Fall wie jenen der Unteren Mühle gäbe es dann nicht mehr.

Thursday, April 11, 2019

हाथरस बीजेपी से निराश, सीट बचाएगा मोदी का राष्ट्रवाद? ग्राउंड रिपोर्ट

"मोदी जी देश के लिए तो बहुत कुछ कर रहे हैं लेकिन किसानों के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं. दो हज़ार रुपये की किस्त देने से किसान का कुछ नहीं होने जा रहा है."

"हम चाहते हैं कि जैसे सरकार गेहूं का समर्थन मूल्य तय करती है, वैसे ही आलू का भी किया जाए. इस क्षेत्र में 95 फ़ीसदी किसान आलू की खेती करते हैं."

"उत्तर प्रदेश के हाथरस ज़िले के सादाबाद ब्लॉक से गुज़रते हुए सड़क के क़रीब एक खेत में आलू खोदकर बोरों में भरते किसानों से जैसे ही उनकी फ़सल के बारे में सवाल किया तो भगत सिंह और उनके दूसरे साथी किसान अपनी तकलीफ़ों का पिटारा खोलकर बैठ गए."

भगत सिंह ने आगे कहा, "हम लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं. एक बीघा में लागत आती है 12 से 14 हज़ार रुपये.और एक बीघे से जितना आलू निकलता है मंडी में उसकी क़ीमत मिलती है 10 हज़ार रुपये. चार हज़ार रुपये अपना घाटा है."

लोकसभा चुनाव क़रीब है. हाथरस में 18 अप्रैल को मतदान होना है तो क्या आलू किसानों के शिकवे का कोई असर चुनावों पर दिखेगा, खेत में मौजूद क़रीब बीस किसानों ने इस सवाल के जवाब में कहा, "हमारा आलू फेंका जा रहा है. चाहे हम भूखे मरें पर हम वोट मोदी जी को ही देंगे."

इस क्षेत्र के किसान बीते तीन साल से सड़क पर आलू फेंकने की वजह से चर्चा में रहे हैं. लेकिन अपनी तकलीफ़ों के मुक़ाबले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'मज़बूत राष्ट्र' का नारा उन्हें ज्यादा भा रहा है.

किसानों ने आगे कहा, "मोदी जी से शिकायत नहीं है लेकिन इनकी जो मशीनरी है, सांसद है, विधायक हैं, वो हमें देख भी नहीं रहे हैं."

सादाबाद ब्लॉक में ही, इस खेत से क़रीब तीन किलोमीटर दूर कुरसंडा गांव में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के संयुक्त प्रत्याशी रामजी लाल सुमन के समर्थन में एक नुक्कड़ सभा हो रही थी.

इसमें लोकदल के नेता गुड्डू चौधरी स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता को लेकर उन्हें कठघरे में खड़ा करने की कोशिश में थे.

"कोई हाथ उठाकर ये कह दे कि उसने आसपास के गांवों में सांसद को देखा है. भारतीय जनता पार्टी के लोग ही बताते हैं कि सांसद जी अपने फ़ोन को पर्मानेंट बंद रखते हैं."

लोकदल नेता गुड्डू हाथरस के मौजूदा सांसद राजेश कुमार दिवाकर का ज़िक्र कर रहे थे. दिवाकर को इस बार भारतीय जनता पार्टी ने टिकट नहीं दिया है. उनकी जगह राजवीर दिलेर को उम्मीदवार बनाया गया है.

दिलेर के पिता किशन लाल भी पहले हाथरस का लोकसभा में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, लेकिन गठबंधन के प्रत्याशी और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामजी लाल सुमन अपना मुक़ाबला शायद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के राष्ट्रवाद के मुद्दे से मानकर चल रहे हैं.

जाट बहुल हाथरस में मुसलमानों की भी अच्छी संख्या है. इस समीकरण को साधकर साल 2009 में राष्ट्रीय लोकदल ने चुनाव जीता था. 1991 के बाद से ये इकलौता मौक़ा था जब भारतीय जनता पार्टी का प्रत्याशी लोकसभा चुनाव जीतने में नाकाम रहा था. 2014 में बीजेपी ने फिर से ये सीट जीत ली थी.

साल 1977 में पहली बार लोकसभा चुनाव जीतने वाले सुमन पांचवीं बार संसद पहुंचने के लिए ज़ोर लगा रहे हैं. कांग्रेस के उम्मीदवार त्रिलोकी राम मुक़ाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में हैं.

सुमन ने अपने छोटे से भाषण में मोदी पर लगातार हमले किए. सुमन ने वहां मौजूद लोगों को लगातार समझाने की कोशिश की कि देश की सुरक्षा गारंटी किसी नेता से नहीं बल्कि सेना से मिलती है.

रामजी लाल सुमन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा, "ये देश किसी प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति की वजह से सुरक्षित नहीं है. ये देश आपके दो लाडले बेटों की वजह से सुरक्षित है. आपने कहा एक खेती करेगा. दूसरे को आपने फ़ौज में भर्ती कर दिया. ये देश किसान के फ़ौजी बेटे की वजह से सुरक्षित है."

थोड़ी देर बाद सुमन बीबीसी से मुख़ातिब थे और उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार आरोप लगाते हुए कहा, "पांच साल में इस सरकार ने गिनाने लायक़ कोई काम नहीं किया."

जब हमने आलू किसानों के साथ हुई अपनी बातचीत उनके साथ साझा की तो सुमन बोले, "कुछ लोगों ने कुछ कह दिया तो हम कुछ कह नहीं सकते. मैं मानता हूं कि लोगों में आक्रोश है. इस बार कम से कम बीजेपी की कोई लहर नहीं. लोगों को उत्तर प्रदेश में गठबंधन के रूप में विकल्प मिल गया है."

रामजी लाल सुमन के आरोपों और दावों को भारतीय जनता पार्टी ने सिरे से ख़ारिज कर दिया. हाथरस में भारतीय जनता पार्टी की ओर से सरकारी योजनाओं की देखरेख के लिए ज़िला प्रमुख बनाए गए अनुज चौधरी ने दावा किया, "मैं यहां आम जनता की राय बताऊं तो स्थिति नब्बे फीसदी और दस फीसदी है. गठबंधन का प्रत्याशी यहां सरेंडर कर चुका है."

हालांकि, चौधरी के पास इस सवाल का जवाब नहीं था कि अगर भारतीय जनता पार्टी हाथरस में इतनी मज़बूत स्थिति में थी तो उसने मौजूदा सांसद का टिकट क्यों काटा?

भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष कप्तान सिंह ठेनुआ ने भी दावा किया कि उनकी पार्टी चुनावी संघर्ष में काफ़ी आगे है.

लेकिन, ज़िले की राजनीति को तटस्थ तौर पर देखने वाले इस दावे को पूरी तौर पर मंज़ूर करने को तैयार नहीं दिखते.

हाथरस के मुरसान क्षेत्र के पूर्व चेयरमैन देशराज सिंह ने कहा कि हाथरस के जनप्रतिनिधियों ने स्थानीय लोगों के लिए कोई काम नहीं किया.

उन्होंने आगे कहा, "यहां बीजेपी को अगर वोट मिलेगा तो मोदी जी के नाम पर मिलेगा और कितना वोट मिलेगा ये 23 मई को साफ़ हो जाएगा."

काका हाथरसी की कविताएं, हींग और देशी घी के लिए प्रसिद्ध रहा हाथरस बीते कुछ सालों से अपनी समस्याओं की वजह से ही चर्चा में आता है.

स्थानीय पत्रकार नीतीश शर्मा के मुताबिक़ आगरा, मथुरा और अलीगढ़ की सीमा से लगे हाथरस ज़िले में कई समस्याएं हैं. किसान फ़सल की क़ीमत को लेकर परेशान हैं. नौजवान रोज़गार को लेकर परेशान हैं. कई क्षेत्रों में सबसे बड़ी समस्या खारे पानी की है. ज़िले में बीजेपी के सांसद और पांच में से चार विधायक हैं लेकिन लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं हो सका है.

Tuesday, April 2, 2019

अमित शाह 370 पर दिन में सपना देख रहे हैंः महबूबा मुफ़्ती - पाँच बड़ी ख़बरें

जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट कर कहा है कि बीजेपी अध्यक्ष संविधान की धारा 370 ख़त्म करने का सपना देख रहे हैं.

उन्होंने लिखा, "अमित शाह दिवास्वप्न देख रहे हैं कि वो धारा 370 ख़त्म करेंगे और प्रधानमंत्री को उम्मीद है कि इससे पाकिस्तान ख़त्म हो जाएगा. देश आगे बढ़ कर रोज़गार, महंगाई जैसे मुद्दों पर बात करना चाहता लेकिन बीजेपी अब भी सिवाय पाकिस्तान के कुछ और नहीं सोच रही. इस बार चुनाव में मूल मुद्दे भूल कर वो बांटने वाली राजनीति कर रहे हैं."

हाल में जम्मू कश्मीर में 370 का मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है. इससे पहले जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को कश्मीर में एक चुनावी रैली के दौरान कहा कि अल्लाह ने चाहा तो कश्मीर में एक बार फिर अलग राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बनाया जा सकेगा.

उनका कहना था कि जम्मू-कश्मीर बाकी रियासतों से अलग है, "बाकी रियासतें बिना शर्त के हिंदुस्तान में शामिल हुईं. हमने शर्तें रखी थीं. हम मुफ़्त में नहीं आए."

चुनाव प्रचार के लिए गिरफ़्तारी से राहत मांग रहे गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के बिमल गुरुंग समेत छह नेताओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट बुधवार को आदेश सुनाएगा.

सुनवाई के दौरान इन नेताओं ने कहा कि राज्य सरकार इन्हें चुनाव से दूर रखने के लिए फ़र्ज़ी मामले बना रही है. उन्होंने कहा कि जो लोग सत्ताधारी टीएमसी से जा मिले उनके केस रद्द किए जा रहे हैं.

सुनवाई के दौरान बिमल गुरुंग की गिरफ़्तारी से रोक की मांग वाली याचिका का पश्चिम बंगाल सरकार ने विरोध किया. टीएमसी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि गुरुंग और उसके साथियों के ख़िलाफ़ आतंकी गतिविधियों मे शामिल होने के पर्याप्त सबूत मिले हैं.

बंगाल सरकार ने यह भी कहा कि इन लोगों के पास से एके-47 रायफल भी मिली है, साथ ही कई बार इन लोगों की अग्रिम जमानत की मांग भी ख़ारिज हो चुकी है.

सुनवाई के दौरान इन नेताओं ने कहा कि उन्हें चुनाव से दूर रखने के लिए उनके ख़िलाफ़ झूठे मामले दर्ज किए जा रहे हैं. इन नेताओं ने गिरफ़्तारी से तीन हफ़्ते की छूट देने की मांग की ताकि चुनाव में हिस्सा ले सकें.

कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए 20 और सीटों पर उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं. इनमें पंजाब के छह, गुजरात से चार, झारखंड से तीन, ओडिशा एवं कर्नाटक से दो-दो और हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़ और दादर एवं नगर हवेली से एक-एक प्रत्याशी का नाम है.

पूर्व रेल मंत्री पवन कुमार बंसल को चंडीगढ़ लोकसभा सीट से, पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की पत्नी और पूर्व केंद्रीय मंत्री परणीत कौर को पटियाला से, झारखंड की रांची सीट से पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय को, हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा सीट से पार्टी ने पवन काजल, पंजाब में गुरदासपुर से सांसद सुनील जाखड़, अमृतसर से गुरजीत सिंह ओजला, लुधियाना से रवनीत सिंह बिट्टू और जालंधर से संतोष सिंह चौधरी, होशियारपुर से राजकुमार छब्बेवाल को टिकट दिया है.

हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के ख़िलाफ़ आय से अधिक संपत्ति मामले में सीबीआई की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई होगी.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएम सप्रे ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है.

पटियाला हाउस की विशेष अदालत ने पिछले साल 10 दिसंबर को वीरभद्र और उनकी पत्नी और अन्य के ख़िलाफ़ आपराधिक कदाचार और आय के ज्ञात स्रोतों से 10 करोड़ रुपये से ज़्यादा की संपत्ति जमा करने के लिए आरोप तय करने का आदेश दिया था.

ब्रितानी प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे ने कहा है कि ब्रेक्सिट मुद्दे पर संसद में जारी असमंजस की स्थिति से निपटने के लिए अधिक वक्त मिले इसके लिए वो ब्रेक्सिट की समयसीमा आगे बढ़ाने के लिए यूरोपीय संघ से गुज़ारिश करेंगी. उनका चाहती हैं कि वो एक डील के साथ यूरोपीय संघ से बाहर निकलें.

टेरीज़ा मे का कहना है कि वो विपक्षी नेता जेरेमी कॉर्बिन से बात कर एक साझा योजना बनाना चाहती हैं. कंज़र्वेटिव पार्टी में ब्रेक्सिट का समर्थन करने वाले नेता मे के इस बयान से नाराज़ हैं, हालांकि यूरोप में उनकी इस पेशकश की तारीफ की जा रही है.

Thursday, March 21, 2019

Unerwarteter Ärger mit dem Eigenheim

Krach um 600 000 Franken Anschlussgebühren nach BaZ-Recherchen beigelegt – Therwil will Reglement revidieren

Therwil. Es geht um viel Geld, ungenaue Verträge, Reglemente, die willkürlich wirken und am Rande auch um die umstrittene Scientology-Kirche.

Zunächst begann alles in Minne. Die Firma Swiss Immo Trust baute von 2013 bis 2014 an guter Lage in Therwil die schmucke Überbauung Untere Mühle mit 26 Eigentumswohnungen. Doch die Freude an den Eigentumswohnungen verging den Bewohnern in den letzten sechs Monaten – nicht aufgrund der Wohnungen an sich, sondern weil plötzlich Forderungen von insgesamt 600 000 Franken im Raum stehen, mit denen die Stockwerkeigentümer nicht gerechnet haben und die für einige von ihnen kaum aufzubringen sind.

Hickhack um Zahlung
Bei dem Betrag handelt es sich um die Anschlussgebühren an die Kanalisation und Wasserversorgung der Gemeinde Therwil. Für die Stockwerkeigentümer ist klar: Diese Gebühren muss der ehemalige Bauherr Swiss Immo Trust bezahlen, denn die Eigentumswohnungen wurden im Zustand «schlüsselfertig» oder «wie besichtigt» verkauft, was auch ein funktionsfähiges Kanalisationssystem mit einschliesse. Eine Einschätzung, die auf Anfrage der BaZ auch der Advokat und Vizepräsident des Hauseigentümerverbandes Baselland, Alexander Heinzelmann, teilt: «Falls nichts Gegenteiliges im Vertrag oder in zusätzlichen, integrierten Vereinbarungen steht, dürfen die Käufer davon ausgehen, dass die Anschlussgebüren im Kaufpreis inbegriffen sind.»

Die Swiss Immo Trust machte jedoch monatelang keine konkreten Anstalten, die Rechnung der Gemeinde zu übernehmen. Glaubt man Simon von Fürstenhaus*, einem der Eigentümer, macht die Firma im Gegenteil Druck: «Zunächst sagten sie uns, dass sie nicht zahlen. Später hiess es dann, dass sie für einen Deal bereit sind, wenn wir auf unseren Anwalt verzichten. Und zu guter Letzt sind sie zu mir nach Hause gekommen und haben mir angeboten, die Gebühren zu übernehmen, falls ich ihnen ein Darlehen von 200 000 bis 350 000 Franken gebe», sagt von Fürstenhaus.

Die Namen, die von Fürstenhaus in diesem Zusammenhang nennt, sind keine Unbekannten und mit der Scientology-Kirche Basel verbunden. Auch die Swiss Immo Trust taucht auf einer Beobachter-Liste der von aktiven Scientologen geführten Firmen auf. Dies, weil der frühere Verwaltungsrat der Swiss Immo Trust, Rudolf Flösser, leitender Direktor bei Scientology Basel ist. Seine Firma, die Dr. Flösser Treuhand GmbH, hat für das Projekt Untere Mühle auch die Bauherrenberatung übernommen.

«Ich habe an sich nichts gegen Scientology», sagt von Fürstenhaus, der eine Hexenjagd gegen Scientology vermeiden will. Das Verhalten der Swiss Immo Trust in den letzten Monaten findet er trotzdem nicht okay und hat sich deshalb an die BaZ gewandt. Mit Erfolg: Was lange nicht möglich schien, war nach einer Anfrage der BaZ innerhalb eines Tages machbar – die Stockwerkeigentümer haben die schriftliche Bestätigung erhalten, dass Swiss Immo Trust die Gebühren übernimmt.

Christian Varga, Verwaltungsrat der Swiss Immo Trust, bestreitet, dass er die Übernahme der Gebühren je mit der Verleihung eines Darlehens verknüpft hat. Obwohl die Swiss Immo Trust die Gebühren nun übernimmt, ist er nach wie vor der Meinung, dass diese im Preis der Wohnung nicht mit eingeschlossen waren: «Die Kanalisations- und Anschlussbeiträge waren gemäss Vertrag von den Käufern zu tragen. Da jedoch üblicherweise die Kanalisations- und Anschlussbeiträge im Kaufpreis inbegriffen sind, haben wir uns aus Kulanzgründen bereit erklärt, diese Kosten zu übernehmen.» Dies habe er den Käufern im Februar mündlich mitgeteilt: «Wir hätten dies damals schriftlich machen können statt lediglich mündlich, um Klarheit zu schaffen», erklärte Varga.

Unangenehme Situationen
Was Simon von Fürstenhaus fast noch mehr ärgert als das Verhalten von Swiss Immo Trust, ist, dass die Gemeinde die Rechnung, in Kenntnis der Fakten, trotzdem an die Stockwerkeigentümer senden wollte. «Nur aufgrund eines willkürlichen Gummi-Reglements konnte es überhaupt zu dieser unangenehmen Situation kommen.» Das Abwasserreglement der Gemeinde besagt, dass bei Neubauten das Datum der Endschätzung des Gebäudes durch die kantonale Gebäudeversicherung Stichdatum für die Beitragspflicht ist. Auf den Termin der Schätzung haben Gemeinde, Verkäufer und Käufer kaum Einfluss. Im Fall der Unteren Mühle führte dieses Stichdatum dazu, dass die Rechnung trotz schlüsselfertigem Kauf an die Stockwerkeigentümer ging.

«Dieses Reglement ist veraltet, das muss auch die Gemeinde sehen. Sie hätte sich in dieser Angelegenheit auf unsere Seite stellen müssen», sagt von Fürstenhaus enttäuscht.

Laut Gemeindeverwalter Theo Kim muss die Gemeinde die Rechnung dem zum Zeitpunkt der Rechnungsstellung im Grundbuch eingetragenen Eigentümer stellen – ausser der Verkäufer bestätigt der Gemeinde, dass er die Kosten übernimmt, was im Fall von Swiss Immo Trust bisher offenbar nicht der Fall war. Die Schwächen des 25-jährigen Reglements, das ähnlich auch in vielen anderen Gemeinden in Kraft ist, sieht er jedoch auch: «Wir haben bemerkt, dass es in Einzelfällen zu verzwickten und unangenehmen Situationen führen kann.

Es gab auch einen Fall, bei dem Käufer tatsächlich zweimal bezahlen mussten», sagt Kim. Deshalb soll das Reglement noch dieses Jahr revidiert und vor die Gemeindeversammlung gebracht werden: «Darin ist vorgesehen, dass die Rechnung zu einem früheren Zeitpunkt erfolgt, zu dem der Verkäufer im Normalfall noch der Besitzer ist.» Einen Fall wie jenen der Unteren Mühle gäbe es dann nicht mehr.

Wednesday, March 6, 2019

Unerwarteter Ärger mit dem Eigenheim

Krach um 600 000 Franken Anschlussgebühren nach BaZ-Recherchen beigelegt – Therwil will Reglement revidieren

Therwil. Es geht um viel Geld, ungenaue Verträge, Reglemente, die willkürlich wirken und am Rande auch um die umstrittene Scientology-Kirche.

Zunächst begann alles in Minne. Die Firma Swiss Immo Trust baute von 2013 bis 2014 an guter Lage in Therwil die schmucke Überbauung Untere Mühle mit 26 Eigentumswohnungen. Doch die Freude an den Eigentumswohnungen verging den Bewohnern in den letzten sechs Monaten – nicht aufgrund der Wohnungen an sich, sondern weil plötzlich Forderungen von insgesamt 600 000 Franken im Raum stehen, mit denen die Stockwerkeigentümer nicht gerechnet haben und die für einige von ihnen kaum aufzubringen sind.

Hickhack um Zahlung
Bei dem Betrag handelt es sich um die Anschlussgebühren an die Kanalisation und Wasserversorgung der Gemeinde Therwil. Für die Stockwerkeigentümer ist klar: Diese Gebühren muss der ehemalige Bauherr Swiss Immo Trust bezahlen, denn die Eigentumswohnungen wurden im Zustand «schlüsselfertig» oder «wie besichtigt» verkauft, was auch ein funktionsfähiges Kanalisationssystem mit einschliesse. Eine Einschätzung, die auf Anfrage der BaZ auch der Advokat und Vizepräsident des Hauseigentümerverbandes Baselland, Alexander Heinzelmann, teilt: «Falls nichts Gegenteiliges im Vertrag oder in zusätzlichen, integrierten Vereinbarungen steht, dürfen die Käufer davon ausgehen, dass die Anschlussgebüren im Kaufpreis inbegriffen sind.»

Die Swiss Immo Trust machte jedoch monatelang keine konkreten Anstalten, die Rechnung der Gemeinde zu übernehmen. Glaubt man Simon von Fürstenhaus*, einem der Eigentümer, macht die Firma im Gegenteil Druck: «Zunächst sagten sie uns, dass sie nicht zahlen. Später hiess es dann, dass sie für einen Deal bereit sind, wenn wir auf unseren Anwalt verzichten. Und zu guter Letzt sind sie zu mir nach Hause gekommen und haben mir angeboten, die Gebühren zu übernehmen, falls ich ihnen ein Darlehen von 200 000 bis 350 000 Franken gebe», sagt von Fürstenhaus.

Die Namen, die von Fürstenhaus in diesem Zusammenhang nennt, sind keine Unbekannten und mit der Scientology-Kirche Basel verbunden. Auch die Swiss Immo Trust taucht auf einer Beobachter-Liste der von aktiven Scientologen geführten Firmen auf. Dies, weil der frühere Verwaltungsrat der Swiss Immo Trust, Rudolf Flösser, leitender Direktor bei Scientology Basel ist. Seine Firma, die Dr. Flösser Treuhand GmbH, hat für das Projekt Untere Mühle auch die Bauherrenberatung übernommen.

«Ich habe an sich nichts gegen Scientology», sagt von Fürstenhaus, der eine Hexenjagd gegen Scientology vermeiden will. Das Verhalten der Swiss Immo Trust in den letzten Monaten findet er trotzdem nicht okay und hat sich deshalb an die BaZ gewandt. Mit Erfolg: Was lange nicht möglich schien, war nach einer Anfrage der BaZ innerhalb eines Tages machbar – die Stockwerkeigentümer haben die schriftliche Bestätigung erhalten, dass Swiss Immo Trust die Gebühren übernimmt.

Christian Varga, Verwaltungsrat der Swiss Immo Trust, bestreitet, dass er die Übernahme der Gebühren je mit der Verleihung eines Darlehens verknüpft hat. Obwohl die Swiss Immo Trust die Gebühren nun übernimmt, ist er nach wie vor der Meinung, dass diese im Preis der Wohnung nicht mit eingeschlossen waren: «Die Kanalisations- und Anschlussbeiträge waren gemäss Vertrag von den Käufern zu tragen. Da jedoch üblicherweise die Kanalisations- und Anschlussbeiträge im Kaufpreis inbegriffen sind, haben wir uns aus Kulanzgründen bereit erklärt, diese Kosten zu übernehmen.» Dies habe er den Käufern im Februar mündlich mitgeteilt: «Wir hätten dies damals schriftlich machen können statt lediglich mündlich, um Klarheit zu schaffen», erklärte Varga.

Unangenehme Situationen
Was Simon von Fürstenhaus fast noch mehr ärgert als das Verhalten von Swiss Immo Trust, ist, dass die Gemeinde die Rechnung, in Kenntnis der Fakten, trotzdem an die Stockwerkeigentümer senden wollte. «Nur aufgrund eines willkürlichen Gummi-Reglements konnte es überhaupt zu dieser unangenehmen Situation kommen.» Das Abwasserreglement der Gemeinde besagt, dass bei Neubauten das Datum der Endschätzung des Gebäudes durch die kantonale Gebäudeversicherung Stichdatum für die Beitragspflicht ist. Auf den Termin der Schätzung haben Gemeinde, Verkäufer und Käufer kaum Einfluss. Im Fall der Unteren Mühle führte dieses Stichdatum dazu, dass die Rechnung trotz schlüsselfertigem Kauf an die Stockwerkeigentümer ging.

«Dieses Reglement ist veraltet, das muss auch die Gemeinde sehen. Sie hätte sich in dieser Angelegenheit auf unsere Seite stellen müssen», sagt von Fürstenhaus enttäuscht.

Laut Gemeindeverwalter Theo Kim muss die Gemeinde die Rechnung dem zum Zeitpunkt der Rechnungsstellung im Grundbuch eingetragenen Eigentümer stellen – ausser der Verkäufer bestätigt der Gemeinde, dass er die Kosten übernimmt, was im Fall von Swiss Immo Trust bisher offenbar nicht der Fall war. Die Schwächen des 25-jährigen Reglements, das ähnlich auch in vielen anderen Gemeinden in Kraft ist, sieht er jedoch auch: «Wir haben bemerkt, dass es in Einzelfällen zu verzwickten und unangenehmen Situationen führen kann.

Es gab auch einen Fall, bei dem Käufer tatsächlich zweimal bezahlen mussten», sagt Kim. Deshalb soll das Reglement noch dieses Jahr revidiert und vor die Gemeindeversammlung gebracht werden: «Darin ist vorgesehen, dass die Rechnung zu einem früheren Zeitpunkt erfolgt, zu dem der Verkäufer im Normalfall noch der Besitzer ist.» Einen Fall wie jenen der Unteren Mühle gäbe es dann nicht mehr.

Wednesday, February 27, 2019

क्या विंग कमांडर अभिनंदन को नचिकेता की तरह भारत वापस लाया जा सकता है?

पाकिस्तान ने कहा है कि भारतीय वायु सेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान उनके क़ब्जे में है. भारत ने पाकिस्तान से विंग कमांडर अभिनंदन की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने को कहा है.

भारत ने नई दिल्ली में पाकिस्तान के उच्चायुक्त को तलब किया और अपना विरोध जताया.

इससे पहले, पाकिस्तान ने पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने नियंत्रण रेखा के पार आए भारत के दो लड़ाकू विमानों को मार गिराया है और दो पायलटों को गिरफ़्तार किया है. लेकिन बाद में कहा कि उसके कब्ज़े में सिर्फ़ एक भारतीय पायलट है.

जिस पायलट की बात हो रही है वो इंडियन एयरफ़ोर्स के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान हैं. उन्होंने बुधवार सुबह फाइटर प्लेन मिग 21 से उड़ान भरी थी.

अब सवाल ये है कि यदि विंग कमांडर अभिनंदन पाकिस्तान के कब्जे में हैं तो उन्हें भारत वापस कैसे लाया जा सकता है. क्या इससे पहले भी ऐसा हुआ था?

तो हम आपको बता दें कि करगिल युद्ध के दौरान भी एक 26 वर्षीय फ्लाइट लेफ्टिनेंट के. नचिकेता पाकिस्तान के कब्जे में थे और बाद में उन्हें भारत के हवाले किया गया था.

करगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान में जी. पार्थसारथी भारतीय उच्चायुक्त थे. पार्थसारथी 1963-1968 के दरम्यान भारतीय सेना के भी अधिकारी रह चुके हैं.

तब नचिकेता की कैसे भारत वापसी हुई थी, इस पर पार्थसारथी ने बीबीसी को ये बताया-

करगिल युद्ध के समय प्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता मिग एयरक्राफ्ट में थे. उन्हें ये आदेश दिये गये थे कि नियंत्रण रेखा पार नहीं करना है. युद्ध के दौरान उन्होंने मिग से आक्रमण किया. लेकिन जब नीचे आए तो मिसाइल ट्रैक से उनको उतारा गया. पाकिस्तान ने उन्हें कब्जे में लिया.

कुछ दिन बाद मुझे पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से संदेश मिला कि प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने कहा है कि नचिकेता को रिहा कर दिया जाए. ये उनकी तरफ से सद्भाव का संकेत था.

उन्होंने कहा कि हम उन्हें रिहा करना चाहते हैं. मैंने कहा ठीक है. मैंने पूछा कहां मिलूं उनसे. तो उन्होंने कहा कि जिन्ना हॉल आइये. मैंने पूछा कहां. तो उन्होंने कहा जिन्ना हॉल.

मुझे पता चला कि जिन्ना हॉल में प्रेस कॉन्फ्रेंस होती है. तो मैंने उनसे पूछा कि जब आप उनकी वापसी करते हैं तो वहां मीडिया होगी. तो उन्होंने कहा 'हां'. इस पर मैंने कहा कि 'असंभव' है, जो युद्धबंदी रहे हैं आपके साथ उसको रिहा करते समय मीडिया रहेगी जिसे मैं कभी स्वीकार नहीं करूंगा. उन्हें अगर दुनिया की मीडिया के सामने उदाहरण बना कर पेश करेंगे तो मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकता. आप उनको निजी तौर पर हमें दें. मैंने दिल्ली को सूचित किया तो वहां से कहा गया कि आपने सही किया.

मुझे पाकिस्तान की तरफ से फिर फ़ोन आया और पूछा गया कि आप बताएं कि उन्हें कैसे छोड़ा जाए. तो मैंने कहा कि देखिए आप से हमारा विश्वास चला गया है, आप उन्हें दूतावास में छोड़ें फिर मैं उनका चार्ज लूंगा. तो उन्हें दूतावास लाया गया और वहां मैंने उनका चार्ज लिया.

रात को उन्हें एयर कमोडोर जसवाल के घर में ठहराया गया और अगले दिन मैंने कहा कि आप जहाज़ में नहीं जाएंगे. मैंने उनको एक गाड़ी में रखा, उनके साथ एयर अटैचे और नेवल अटैचे (वायु सेना और नेवी का अधिकारी जो एक राजनयिक मिशन का हिस्सा होता है) को भेजकर वाघा में अपनी सेना के सुपुर्द करने को कहा. नचिकेता हफ़्ते-दो हफ़्ते पाकिस्तान के कब्जे़ में रहे.

1965 के जंग में मैं सियालकोट में था. यदि पाकिस्तान के कब्जे़ में आने के बाद उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ तो यह अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन है.

मीडिया में पायलट की तस्वीर रिलीज़ करना और उनके हाथ बंधे वीडियो जारी करना युद्ध की नीतियों के ख़िलाफ़ है.

जैसे नचिकेता को रिहा करवाया गया था उसी तरह से कार्रवाई होनी चाहिए.

पाकिस्तान की तरफ़ से हमले किये गए. उनका विमान गिराया गया है लेकिन वो कभी इसे स्वीकार नहीं करते हैं.

आक्रोश तो होगा ही. युद्ध में पहली बार नहीं है कि हमारे पायलट उनके कब्जे में हैं. वो एक उदाहरण है.

सरकार जो उचित समझे उस पर कार्रवाई करे. जब उपयुक्त समय आएगा तो यह स्वाभाविक है उस पर बात की जाएगी, कल सुबह बात करनी है कि नहीं, यह सरकार का फ़ैसला है.

युद्धबंदियों पर जेनेवा कन्वेंशन लागू होता है. जेनेवा कन्वेंशन के हिसाब से पाकिस्तान को उनके साथ मानवीय व्यवहार करना होगा.

Friday, February 15, 2019

澳门的葡国菜:鲜为人知的融合料理

沿着澳门的一条小巷走下去,到了一家不起眼的餐厅,这里的风貌与拉斯维加斯风格赌场华丽的霓虹灯和闪闪发光的外墙相去甚远。这些赌场是这个位于中国南部沿海的特别行政区的标志。然而,在这条小巷,隐藏着一个与邻近的赌场地带截然不同的世界:一个充满了过去味道和旧澳门精神的地方。

“我敢说,澳门葡国菜(Macanese cuisine)是世界上第一种融合料理,”帕尔默(Sonia Palmer)说。对面坐着她的母亲,103岁的耶苏斯(Aida de Jesus)。她们的这家小餐厅叫Riquexó,母女二人已经共同经营了35年。澳门葡国菜,一种葡萄牙和中国菜的独特组合,其烹饪历史可以追溯到450多年前,即16世纪澳门作为贸易站刚被租给葡萄牙之时。

帕尔默解释说,澳门葡国菜和土生葡人社群一样,都起源于中国人和葡萄牙人的通婚。“中国妻子尽可能烹饪一些葡萄牙丈夫在葡萄牙自幼吃惯的家乡菜。但是,那时他们在澳门无法获得所有的调料,所以妻子们就用一些中国和东南亚的调料来代替。这就是这种融合料理的由来。”

说到开创,帕尔默说,她的母亲本身就是一位葡国菜先驱者,所以有“澳门葡国菜教母”之称。“我母亲开Riquexó餐厅的时候,那是城里第一家澳门葡国菜餐厅;在那之前,葡国菜主要是在家里烹调的家常菜。”

帕尔默说,尽管她的母亲已经年迈,但她仍然每天来到这家餐厅。“她不想只是坐在家里盯着四面墙看。来这里,她可以坐下来和顾客聊天。她也来这里吃饭。厨师们烹调的所有菜肴她还会给与意见,告诉他们需要改善的地方。”

这个家族经营的餐厅小而温馨,墙上挂满了老澳门的照片,让人回想起过去的时光,吸引了形形色色的顾客,他们都对餐厅正宗的澳门葡国菜和合理的价格赞不绝口。常客包括来自当地的葡萄牙人、土生葡人和华人,其中一些食客每天必定来此开餐。帕尔默解释说,来自外地的游客也会来这里参观,不过不会经常有,因为这里不是旅游区。“一些游客专程找到这里,他们总是很高兴,因为他们可以体验到真正的澳门味道。我想他们是通过上网找到我们的餐厅的。”

除了作为融合料理先驱的传统,如今的澳门葡国菜还承担着帮助保存日渐衰落的澳门葡国文化的角色。1999年澳门从葡萄牙殖民手上移交给中国时,大量土生葡人移居海外,澳门目前约有66.34万人,其中约90%是中国人。随着数量的减少,人们担心澳门土生葡人社群面临灭绝的危险。

帕尔默说, “不幸的是,如今澳门的土生葡人社群并不大。我认为只有大约1000人。自主权移交以来,澳门不再有大量葡萄牙人与当地人通婚,因此澳门土生葡人社群没有增长。

土生葡人社群有他们自己的语言,称为巴度亚语(Patuá,也成为澳门土生葡语)。这种葡萄牙混合语起源于16世纪澳门开始被葡萄牙人控制之时。然而,联合国教科文组织在2000年估计,巴度亚语的使用者现不超过50人,已将其列为极度濒危语言。眼看着巴度亚语接近消亡,澳门剩下的土生葡人希望他们钟爱的美食不会遭受同样的命运。帕尔默和她的母亲热衷于保存土生葡人的饮食烹饪,她们一直在分享自己的家庭食谱,希望那些积极进取的厨师们能够延续其传统。

帕尔默说,“澳门有一家教育餐厅,他们在那里培训下一代厨师。我们和他们分享了很多食谱,因为我们希望土生葡人的菜品能够延续下去。我们觉得没有必要对我们的食谱保密。无论谁向我们要,我们都会分享。”

他们最喜欢的一道菜是porco bafassa,这是一道丰盛的澳门葡国菜,由嫩炖猪肉和炖土豆配姜黄汁。另一道是tacho,是一种仿葡萄牙传统慢炖菜,把卷心菜、火腿、猪肉炖在一起的葡国菜大杂烩,原来的葡萄牙辣味香肠(chouriço)则用中国香肠代替。

受到厨艺学徒的热情鼓舞,帕尔默仍然乐观地认为,澳门葡国菜将会继续流行。“如今,要让澳门葡国文化在澳门继续存在,是非常具有挑战性的。但幸运的是,我有几个朋友开了餐馆,即使我家放弃,他们也会让这种菜式传承下去。”

其中一位朋友是当地的土生葡人厨师阿尔维斯(Florita Alves),她热衷于继续帕尔默和她的母亲开创的工作,推广澳门葡国菜。今年早些时候,阿尔维斯在自家的La Famiglia餐厅推出了一份葡国菜菜单。她的餐厅位于澳门旅游热点凼仔(Taipa Village)中心,提供经典的澳门葡国菜,比如葡国鸡(一种和椰奶、碎椰肉和姜黄粉一起炖的椰子鸡),阿尔维斯的使命是通过食物保护她的文化,她认为这是最直接和简单的方法。

阿尔维斯说,“客人上门,一开始我会介绍一些招牌的澳门葡国菜,比如免治肉(minchi,炒碎牛肉和碎猪肉,或只炒碎牛肉), 这道可口的菜很适合用来介绍葡国菜,因为味道好吃,而且大多数客人都喜欢。之后,我会加入更多的时令菜肴,一步步地提高人们对葡国菜的兴趣。”

Friday, February 8, 2019

डिमेंशिया पीड़ितों को ठीक करेगा रोबोट, टीवी शो दिखाकर दी जा रही ट्रेनिंग

एक रोबोट को टीवी शो इसलिए दिखाया गया ताकि वह डिमेंशिया के लक्षणों को पहचान सके। दावा है कि इस तरह का यह पहला रोबोट है, जिसने टीवी शो देखकर फेशियल एक्सप्रेशन को पहचानना सीखा। दरअसल, ‘रॉबी’ नाम के रोबोट को टीवी शो ‘इमरडेल’ दिखाया गया। इसमें एश्ले थॉमस नाम का कैरेक्टर डिमेंशिया से पीड़ित होता है। डिमेंशिया एक तरह की बीमारी होती है, जिसमें इंसान की याद्दाश्त कमजोर हो जाती है और वह छोटी-छोटी बातें भी भूल जाता है।

इंसान के चेहरे को समझ सकता है रॉबी
रॉबी को एज हील यूनिवर्सिटी के कम्प्यूटर साइंटिस्ट डॉ. एर्डेन्डु बेहेरा और उनकी टीम ने तैयार किया है। इस रोबोट को इंसान की तरह ही आकार दिया गया है, जो चल सकता है और मूवमेंट भी कर सकता है। ये रोबोट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी की मदद से इंसान के चेहरे को समझ और पढ़ सकता है।

यह रोबोट उनकी बॉडी लैंग्वेज और बिहेवियर को भी समझ सकता है। रॉबी को तैयार करने वाली टीम को उम्मीद है कि ये रोबोट डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति की निगरानी करने और उन्हें इससे उबरने में मदद कर सकता है। डिमेंशिया से दुनियाभर में 4.7 करोड़ लोग पीड़ित हैं।

इससे डिमेंशिया पीड़ितों को मदद मिलेगी
डॉ. बेहेरा ने बताया, 'रॉबी डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति के बिहेवियर को समझ सकता है। उनकी दिमागी समस्या को देख सकता है और देख सकता है कि वे कितना एक्टिव हैं, क्या खाते-पीते हैं और क्या वे नियमित रूप से दवाई लेते हैं?' उन्होंने बताया, "फिलहाल डिमेंशिया को ठीक करने का इकलौता तरीका ऑब्जर्वेशन है और इसमें काफी समय लगता है और इसमें खर्चा भी होता है लेकिन इस रोबोट की मदद से इसे कम किया जा सकेगा।"

चार तरह के बिहेवियर पहचान सकता है रॉबी
डॉ. बेहेरा के मुताबिक, इस रोबोट को डिजाइन करने का मकसद ऐसे लोगों की मदद करना है, जो अकेले रहते हैं और अकेलेपन में उन्हें अपनी मदद के लिए किसी की जरूरत होती है। उन्होंने बताया, "रॉबी पहला ऐसा रोबोट है जो विजन-बेस्ड रिकग्निशन तकनीक का उपयोग करता है। इसकी मदद से ये एग्रेसिव, डिप्रेसिव, खुशी और न्यूट्रल चार तरह के बिहेवियर समझने में सक्षम है।"

उन्होंने दावा किया कि रॉबी इस बात का पता भी लगा सकता है कि डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति क्या परेशानी में है? वह उसे शांत करने के लिए हल्का म्यूजिक बजा सकता है। टीम ने दावा किया है कि रॉबी 80 तरह की इंसानी भावनाओं को भी समझ सकता है और एक दिन इसका इस्तेमाल डिमेंशिया को ठीक करने में किया जाएगा।

इस तरह मदद कर सकता है ये रोबोट
टीम में शामिल एक छात्र जैचरी व्हार्टन का कहना है, "रॉबी को तैयार करने का मकसद डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति के बिहेवियर को समझना है। साथ ही ये पता लगाना है कि पीड़ित व्यक्ति कब और कैसे गुस्सा दिखाना शुरू करता है और खुद को शांत करने के लिए क्या करता है।"

व्हार्टन ने बताया कि जब डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति किसी परेशानी में होता है तो उसे शांत करने का सबसे अच्छा तरीका है कि उसके साथ खेलें, गाने सुनाएं या उससे बात करें और ये सब रॉबी कर सकता है। ये रोबोट न सिर्फ पीड़ित व्यक्ति के जीवन का अहम हिस्सा बन सकता है बल्कि उन्हें ठीक होने में भी मदद कर सकता है।

Wednesday, January 30, 2019

जॉर्ज फ़र्नांडिस का निधन, जया जेटली से शोक जताते लोग: ब्लॉग

"मैं जया जेटली के बारे में सोच रही हूं. हम जिस दुनिया में रहते हैं वहां बहुत अन्याय होता है. भगवान उन्हें हिम्मत और शांति दे."

"जया जेटली को हिम्मत मिले- जो उन्हें प्यार करती थीं और जिन्होंने उनका ख्याल रखा जब उनके परिवार समेत बाक़ी उन्हें छोड़कर चले गए."

"जॉर्ज फ़र्नांडिस, जिनके बंद के एक आह्वान से पूरा भारतीय रेल का काम रुक जाता था, नहीं रहे. इस व़क्त में मैं, लंबे समय तक उनकी दोस्त रहीं जया जेटली के बारे में सोच रही हूं."

पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फ़र्नांडिस के निधन पर ट्विटर पर ये शोक संदेश जया जेटली को लिखे जा रहे हैं.

पत्रकार भी जॉर्ज फ़र्नांडि

स के अंतिम संस्कार की जानकारी समता पार्टी की पूर्व अध्यक्ष जया जेटली से ही मांग रहे थे.

जया जेटली, जॉर्ज फ़र्नांडिस से अपने रिश्ते को दोस्ती का ही नाम देती आई हैं. ये अलग बात है कि वो कई साल उनके साथ उनके घर में रहीं, जिसे आम भाषा में 'लिव-इन रिलेशनशिप' की संज्ञा दी गई है.

लेकिन आम जनता ने इन नेताओं को 'लिव-इन रिलेशनशिप' में होने की वजह से नकारा नहीं, ना ही इन नेताओं ने इस सच्चाई को कभी छिपाया.

बीबीसी संवाददाता रेहान फ़ज़ल के साथ बातचीत में एक बार जया जेटली ने इस रिश्ते को कुछ यूं उकेरा था, "कई किस्म के दोस्त हुआ करते हैं और दोस्ती के भी कई स्तर होते हैं. महिलाओं को एक किस्म के बौद्धिक सम्मान की बहुत ज़रूरत होती है. हमारे पुरुष प्रधान समाज के अधिकतर लोग सोचते हैं कि महिलाएं कमज़ोर दिमाग और कमज़ोर शरीर की होती हैं. जॉर्ज वाहिद शख़्स थे जिन्होंने मुझे विश्वास दिलाया कि महिलाओं की भी राजनीतिक सोच हो सकती है."

राजनीतिक काम के चलते हुई ये दोस्ती समय के साथ गहरी हुई. जब जया और उनके पति अशोक जेटली अलग हो गए और जॉर्ज और उनकी पत्नी लैला कबीर अलग हो गए, तब 1980 के दशक में जया जॉर्ज के साथ रहने लगीं.

जया ने कहा उनके रिश्ते में "रोमांस का पुट बिल्कुल नहीं था" पर लोग बहुत बातें बनाते थे. तो जॉर्ज उन्हें कहते थे कि राजनीति फूलों की सेज नहीं है, इसलिए इंतज़ार मत करो कि कोई आपका बिस्तर ठीक करेगा.

जॉर्ज के साथ रहना उनका अपना फ़ैसला था. जया कहती हैं कि जॉर्ज ने साफ़ कहा था कि बहुत मुश्किल लगने लगे, तो वो छोड़ के जाने के लिए आज़ाद हैं.

अब से 30 साल पहले, जब 'लिव-इन रिलेशनशिप' के बारे में ना ख़ुली बहस थी, ना ख़ुली सोच और ना ही सुप्रीम कोर्ट के किसी फ़ैसले या घरेलू हिंसा के क़ानून के ज़रिए इसे क़ानूनी मान्यता मिली थी.

अब क़ानून की नज़र में लंबे समय तक साथ रह चुके मर्द और औरत को शादीशुदा माना जाता है, उनकी संतान जायज़ मानी जाती है और ऐसे रिश्ते में रहने की बिनाह पर 'पत्नी' की ही तरह, औरत घरेलू हिंसा की शिकायत कर सकती हैं.

पर तब नहीं. और तब ये दोनों नेता अपने शीर्ष पर थे, जॉर्ज फ़र्नांडिस रक्षा मंत्री थे और जया जेटली समता पार्टी की अध्यक्ष.

लेखिका और स्तम्भकार शोभा डे कहती हैं कि जया जेटली और जॉर्ज फ़र्नाडिस सिर्फ़ समता पार्टी में 'साथ काम करनेवाले' सहयोगी नहीं थे, उनके बीच का रिश्ता सिर्फ़ समाजवादी विचारधारा से जुड़ा नहीं था.

उनके बीच गहरे संबंध थे, जो कि जगज़ाहिर थे और उन्होंने ये कभी छिपाने की कोशिश नहीं की.

राजनीति जैसे सार्वजनिक जनहित के काम से जुड़े लोग अपनी निजी ज़िंदगी के बारे में 'पाक साफ़' छवि बनाना पसंद करते हैं.

अमरीकी राजनीति में पति-पत्नी और बच्चों समेत पूरा परिवार होना किसी भी राजनेता के लिए एक उप्लब्धि जैसा माना जाता है और वो अपने प्रचार में इसका इस्तेमाल भी करते हैं.

भारत में भी परिवार का ऊंचा दर्जा है. 'लिव-इन रिलेशनशिप' या दूसरी शादी को कुछ कमतर ही माना जाता है. पर राजनेता इन दोनों रास्तों पर चलते आए हैं और जनता ने उन्हें नहीं ठुकराया है.

कर्नाटक के मुख़्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के अभिनेत्री राधिका कुमारस्वामी के रिश्तों के बारे में भी कई कयास लगे पर व्हाट्सऐप पर बंट रहे चुटकुलों और सोशल मीडिया के गलियारों से आगे उनका असर नहीं दिखता.

एचडी. कुमारस्वामी ने सार्वजनिक तौर पर कभी राधिका कुमारस्वामी को अपनी पत्नी नहीं बताया है पर इस रिश्ते को नकारा भी नहीं है.

आजीवन अविवाहित रहने वाले अटल बिहारी वाजपेयी का राजकुमारी कौल के साथ रिश्ता हमेशा चर्चा में रहा, हालांकि वाजपेयी ने भी इस रिश्ते के बारे में कभी कुछ नहीं कहा.

दोनों ग्वालियर के मशहूर विक्टोरिया कॉलेज (रानी लक्ष्मीबाई कॉलेज) में साथ पढ़ते थे. बाद में राजकुमारी कौल और उनके पति से अटल बिहारी वाजपेयी की दोस्ती और गहरी हो गई.

वाजपेयी जब प्रधानमंत्री बने तो श्रीमती कौल का परिवार 7 रेस कोर्स में स्थित प्रधानमंत्री आवास में ही रहने लगा. उनकी दो बेटियां थीं. जिनमें से छोटी बेटी नमिता को अटल ने गोद ले लिया था.

सैवी पत्रिका को दिए गए एक साक्षात्कार में श्रीमती कौल ने कहा, "मैंने और अटल बिहारी वाजपेयी ने कभी इस बात की ज़रूरत नहीं महसूस की कि इस रिश्ते के बारे में कोई सफ़ाई दी जाए."