Wednesday, January 30, 2019

जॉर्ज फ़र्नांडिस का निधन, जया जेटली से शोक जताते लोग: ब्लॉग

"मैं जया जेटली के बारे में सोच रही हूं. हम जिस दुनिया में रहते हैं वहां बहुत अन्याय होता है. भगवान उन्हें हिम्मत और शांति दे."

"जया जेटली को हिम्मत मिले- जो उन्हें प्यार करती थीं और जिन्होंने उनका ख्याल रखा जब उनके परिवार समेत बाक़ी उन्हें छोड़कर चले गए."

"जॉर्ज फ़र्नांडिस, जिनके बंद के एक आह्वान से पूरा भारतीय रेल का काम रुक जाता था, नहीं रहे. इस व़क्त में मैं, लंबे समय तक उनकी दोस्त रहीं जया जेटली के बारे में सोच रही हूं."

पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फ़र्नांडिस के निधन पर ट्विटर पर ये शोक संदेश जया जेटली को लिखे जा रहे हैं.

पत्रकार भी जॉर्ज फ़र्नांडि

स के अंतिम संस्कार की जानकारी समता पार्टी की पूर्व अध्यक्ष जया जेटली से ही मांग रहे थे.

जया जेटली, जॉर्ज फ़र्नांडिस से अपने रिश्ते को दोस्ती का ही नाम देती आई हैं. ये अलग बात है कि वो कई साल उनके साथ उनके घर में रहीं, जिसे आम भाषा में 'लिव-इन रिलेशनशिप' की संज्ञा दी गई है.

लेकिन आम जनता ने इन नेताओं को 'लिव-इन रिलेशनशिप' में होने की वजह से नकारा नहीं, ना ही इन नेताओं ने इस सच्चाई को कभी छिपाया.

बीबीसी संवाददाता रेहान फ़ज़ल के साथ बातचीत में एक बार जया जेटली ने इस रिश्ते को कुछ यूं उकेरा था, "कई किस्म के दोस्त हुआ करते हैं और दोस्ती के भी कई स्तर होते हैं. महिलाओं को एक किस्म के बौद्धिक सम्मान की बहुत ज़रूरत होती है. हमारे पुरुष प्रधान समाज के अधिकतर लोग सोचते हैं कि महिलाएं कमज़ोर दिमाग और कमज़ोर शरीर की होती हैं. जॉर्ज वाहिद शख़्स थे जिन्होंने मुझे विश्वास दिलाया कि महिलाओं की भी राजनीतिक सोच हो सकती है."

राजनीतिक काम के चलते हुई ये दोस्ती समय के साथ गहरी हुई. जब जया और उनके पति अशोक जेटली अलग हो गए और जॉर्ज और उनकी पत्नी लैला कबीर अलग हो गए, तब 1980 के दशक में जया जॉर्ज के साथ रहने लगीं.

जया ने कहा उनके रिश्ते में "रोमांस का पुट बिल्कुल नहीं था" पर लोग बहुत बातें बनाते थे. तो जॉर्ज उन्हें कहते थे कि राजनीति फूलों की सेज नहीं है, इसलिए इंतज़ार मत करो कि कोई आपका बिस्तर ठीक करेगा.

जॉर्ज के साथ रहना उनका अपना फ़ैसला था. जया कहती हैं कि जॉर्ज ने साफ़ कहा था कि बहुत मुश्किल लगने लगे, तो वो छोड़ के जाने के लिए आज़ाद हैं.

अब से 30 साल पहले, जब 'लिव-इन रिलेशनशिप' के बारे में ना ख़ुली बहस थी, ना ख़ुली सोच और ना ही सुप्रीम कोर्ट के किसी फ़ैसले या घरेलू हिंसा के क़ानून के ज़रिए इसे क़ानूनी मान्यता मिली थी.

अब क़ानून की नज़र में लंबे समय तक साथ रह चुके मर्द और औरत को शादीशुदा माना जाता है, उनकी संतान जायज़ मानी जाती है और ऐसे रिश्ते में रहने की बिनाह पर 'पत्नी' की ही तरह, औरत घरेलू हिंसा की शिकायत कर सकती हैं.

पर तब नहीं. और तब ये दोनों नेता अपने शीर्ष पर थे, जॉर्ज फ़र्नांडिस रक्षा मंत्री थे और जया जेटली समता पार्टी की अध्यक्ष.

लेखिका और स्तम्भकार शोभा डे कहती हैं कि जया जेटली और जॉर्ज फ़र्नाडिस सिर्फ़ समता पार्टी में 'साथ काम करनेवाले' सहयोगी नहीं थे, उनके बीच का रिश्ता सिर्फ़ समाजवादी विचारधारा से जुड़ा नहीं था.

उनके बीच गहरे संबंध थे, जो कि जगज़ाहिर थे और उन्होंने ये कभी छिपाने की कोशिश नहीं की.

राजनीति जैसे सार्वजनिक जनहित के काम से जुड़े लोग अपनी निजी ज़िंदगी के बारे में 'पाक साफ़' छवि बनाना पसंद करते हैं.

अमरीकी राजनीति में पति-पत्नी और बच्चों समेत पूरा परिवार होना किसी भी राजनेता के लिए एक उप्लब्धि जैसा माना जाता है और वो अपने प्रचार में इसका इस्तेमाल भी करते हैं.

भारत में भी परिवार का ऊंचा दर्जा है. 'लिव-इन रिलेशनशिप' या दूसरी शादी को कुछ कमतर ही माना जाता है. पर राजनेता इन दोनों रास्तों पर चलते आए हैं और जनता ने उन्हें नहीं ठुकराया है.

कर्नाटक के मुख़्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के अभिनेत्री राधिका कुमारस्वामी के रिश्तों के बारे में भी कई कयास लगे पर व्हाट्सऐप पर बंट रहे चुटकुलों और सोशल मीडिया के गलियारों से आगे उनका असर नहीं दिखता.

एचडी. कुमारस्वामी ने सार्वजनिक तौर पर कभी राधिका कुमारस्वामी को अपनी पत्नी नहीं बताया है पर इस रिश्ते को नकारा भी नहीं है.

आजीवन अविवाहित रहने वाले अटल बिहारी वाजपेयी का राजकुमारी कौल के साथ रिश्ता हमेशा चर्चा में रहा, हालांकि वाजपेयी ने भी इस रिश्ते के बारे में कभी कुछ नहीं कहा.

दोनों ग्वालियर के मशहूर विक्टोरिया कॉलेज (रानी लक्ष्मीबाई कॉलेज) में साथ पढ़ते थे. बाद में राजकुमारी कौल और उनके पति से अटल बिहारी वाजपेयी की दोस्ती और गहरी हो गई.

वाजपेयी जब प्रधानमंत्री बने तो श्रीमती कौल का परिवार 7 रेस कोर्स में स्थित प्रधानमंत्री आवास में ही रहने लगा. उनकी दो बेटियां थीं. जिनमें से छोटी बेटी नमिता को अटल ने गोद ले लिया था.

सैवी पत्रिका को दिए गए एक साक्षात्कार में श्रीमती कौल ने कहा, "मैंने और अटल बिहारी वाजपेयी ने कभी इस बात की ज़रूरत नहीं महसूस की कि इस रिश्ते के बारे में कोई सफ़ाई दी जाए."

Tuesday, January 22, 2019

भारतीय मूल की महिला, जो चुनावों में डोनल्ड ट्रंप को दे सकती हैं चुनौती

भारतीय मूल की अमरीकी सांसद कमला हैरिस ने कहा है कि वो 2020 में होने वाले चुनावों में राष्ट्रपित पद की दौड़ में शामिल होंगी.

डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़ी कमला आठवीं शख़्स हैं, जो पार्टी की तरफ़ से किए जाने वाले नामांकन के लिए दावा करेंगी.

वो साल 2016 में कैलीफ़ोर्निया से सांसद बनी थीं. इससे पहले वो यहां की अटार्नी जनरल थीं.

उन्होंने एबीसी से कहा, "मैं अपने देश से प्यार करती हूं और बेहतरी के लिए लड़ूंगी."

54 साल की कमला राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की मुखर आलोचक हैं और समझा जा रहा है कि वो पार्टी के अंदर तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं.

एलिजाबेथ वारेन, क्रिस्टन गिलीब्रांड, तुलसी गबार्ड, जॉन डेलेन और जूलियन कास्त्रो ने भी इस दौड़ में शामिल होने की घोषणा पहले ही कर दी है.

कमला हैरिस ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें वो कहती हैं, "हमारे देश का भविष्य आप और आप जैसे लाखों लोगों पर निर्भर करता है, जो अमरीकी मूल्यों के लिए आवाज़ उठाते हैं. यही कारण है कि मैं राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल हो रही हूं. मैं उन आवाज़ों को उठाऊंगी."

यह पहली दफ़ा है जब डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर एक से ज़्यादा महिलाएं पार्टी की तरफ़ से किए जाने वाले नॉमिनेशन के लिए लड़ रही हैं.

चुनावी अभियान में इस बार चार महिलाएं मैदान में होंगी और यही वजह है कि इसे पहले से ही रिकॉर्ड ब्रेकिंग समझा जा रहा है.

अगर पार्टी कमला हैरिस को उम्मीदवार बनाती है तो वो पहली अफ्रीकी-अमरीकी या भारतीय-अमरीकी महिला उम्मीदवार होंगी, जो किसी बड़ी पार्टी से चुनावी मैदान में होंगी.

कमला हैरिस दो बार, साल 2004 से 2011 तक सैन फ्रांसिस्को की डिस्ट्रिक्टि अटार्नी रह चुकी हैं.

इसके बाद वो साल 2011 से 2017 तक कैलिफोर्निया की अटार्नी जनरल रहीं. वो पहली अश्वेत महिला हैं, जो इन पदों पर इतने साल तक रही हैं.

कमला हैरिस जमैका और भारतीय प्रवासी की बेटी हैं, जिन पर पहचान की राजनीति करने के आरोप लगते रहे हैं.

पिछले साल गर्मियों में कमला ने एक कॉन्फ्रेंस में कहा था, "इस तरह के आरोपों का इस्तेमाल हमें चुप कराने के लिए किया जाता रहा है."

उन्होंने गर्भपात पर दिए गए एक जज के बयान और 2016 के चुनावों में रूसी हस्तक्षेप पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद वो पार्टी के नेताओं के नज़र में आईं.

हालांकि कमला की आलोचना उस वक़्त ख़ूब हुई थी जब उनकी एक सहयोगी ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए साल 2016 में पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया था.

Friday, January 18, 2019

एजुकेशन सिस्टम की खामियां उजागर करती है फिल्म, इमरान की एक्टिंग में दिखा दम

इमरान हाशमी की 'व्हाय चीट इंडिया' का उद्देश्य ताे मौजूदा दौर के लिहाज से एकदम सटीक है लेकिन इसका एक्जीक्यूशन पुराने ढंग से किया गया और नीरस है। यह फिल्म निर्देशक सौमिक सेन का प्रयास है जिसमें देश की त्रुटिपूर्ण शिक्षा प्रणाली पर जबरदस्त तंज कसा गया है। 

क्या है फिल्म में खास
एजुकेशन सिस्टम की सबसे बड़ी खामी
राकेश सिंह उर्फ रॉकी (इमरान हाशमी) एक ऐसा चालाक आदमी है जो कि गरीब लेकिन होशियार और काबिल स्टूडेंट्स से नाकारा अमीर बच्चों के लिए एंट्रेंस एग्जाम्स दिलवाता है और उन अमीर बच्चों के माता-पिता से खूब पैसे वसूलता है। रॉकी केवल नकद में सौदा करता है और ऐसा करते हुए वह पकड़ा न जाए इसके सारे पैंतरे उसे आते हैं।

सत्येंद्र दुबे उर्फ सत्तू (स्निग्धदीप चटर्जी ) एक उज्ज्वल इंजीनियरिंग छात्र है, जो अपने गरीब लेकिन अति महत्वाकांक्षी पिता के दबाव में है। रॉकी हमेशा सत्येंद्र की कमजोरी का फायदा उठाकर उसे जाल में फंसाता है, जिससे वह कभी नहीं निकाल पाता। इस बीच, सत्येंद्र की बहन नुपुर (श्रेया धनवंतरी) को रॉकी से प्यार हो जाता है।

रॉकी एजुकेशन सिस्टम में खामियों का सबसे अच्छा उपयोग करता है, वह अपने कामों के लिए फालतू के कारण बताकर उसे जस्टिफाई करने की कोशिश करता है। वह अहंकारी है और यह जानता है कि जब भी वह पकड़ा जाता है, तो इससे बाहर कैसे निकलना है। रॉकी तब तक अजेय लगता है जब तक कि घटनाओं के एक आश्चर्यजनक मोड़ के बीच अनजाने में वह पकड़ा नहीं जाता।

कमजोर निर्देशन जुड़ने नहीं देता
इमरान ने फिल्म में यथार्थ अभिनय किया है। एक चालाक आदमी के रूप में वे दुनिया को ये समझाने का प्रयास करते हैं कि वे जो कर रहे हैं वह समाज के हित में है। हालांकि नीरस और असंगत पटकथा और फीका डायरेक्शन आपको रॉकी की यात्रा में शामिल होने से रोकता है। सेन के निर्देशन में उस समय स्पार्क दिखता है जब वह इस बात पर जोर देते हैं कि एक क्रिमनल अपने परिवार के साथ वैसा ही रहता है जिस तरह हम और आप।

रॉकी और नुपूर का लव ट्रेक फिल्म में वैल्यू एडिशन करने की जगह जबरदस्ती डाला लगता है। फिल्म का फर्स्ट हाफ आपको इंगेज रखता है जिसमें आप पैसों का स्वाद चखने के बाद सत्तू का पतन होते देखते हैं। सेकंड हाफ में ट्विस्ट होने के बाद भी यह आपको बांधकर नहीं रख पाता। 

एक्टिंग में जमे नए कलाकार
फिल्म में भाई-बहन का किरदार निभाने वाले दोनों युवा कलाकार स्निग्धादीप चटर्जी और श्रेया धनवंतरी ने अच्छा अभिनय किया है। जबकि शिक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार की कहानी आज भी बहुत प्रासंगिक है वही सेन का डायरेक्शन थोड़ा और मजबूत होना चाहिए था।

इसलिए देखें फिल्म
इस फिल्म को देखें क्योंकि यह एक प्रासंगिक विषय पर जोर देती है कि सिस्टम को बदलने की सख्त जरूरत क्यों है। यह हर उस बच्चे के भयंकर दबाव को भी उजागर करती है जो महत्वाकांक्षी और नियंत्रण में रखने वाले भारतीय माता-पिता अपने बच्चों पर डालते हैं।

Thursday, January 10, 2019

मुझसे प्यार क्यों नहीं करती, कहकर सनकी आश‍िक ने मह‍िला के प्राइवेट पार्ट पर क‍िए वार

मध्यप्रदेश में इंदौर में बुधवार शाम एक लड़के ने 25 साल की शादीशुदा महिला की घर में घुसकर चाकू से गोदकर हत्या कर दी. वह कई दिनों से उसके पीछे पड़ा था. जब मह‍िला का पत‍ि बाहर गया तो मौका देखकर पहले तो प्यार का इजहार क‍िया और उससे भी इजहार करवाना चाहा. न मानने पर उसकी हत्या कर दी.

पुल‍िस के मुताबिक, स्कीम नंबर 78 में किराए पर रहने वाली काजल शाक्य पर 26 साल के निखिल सोलंकी ने चाकू से पैर, हाथ, पेट और प्राइवेट पार्ट पर कई वार किए. पड़ोसी और उसकी सास ने उसे बॉम्बे हॉस्पिटल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. मह‍िला का पति शुभम शाक्य एक शादी में राजस्थान गया हुआ था.

पुलिस ने बताया क‍ि काजल ने मौत से पहले बयान में कहा कि निखिल उसे कई दिनों से परेशान कर रहा था. बुधवार  शाम 7.30 बजे वह पानी भर रही थी, तभी वह चाकू लेकर घर में घुस आया और कहने लगा कि तुम मुझसे प्यार क्यों नहीं करती? इसे लेकर उसने पहले विवाद किया. फिर चाकू निकालकर कई वार क‍िए.

गला पकड़कर जमीन पर गिरा दिया

एक प्रत्यक्षदर्शी महिला ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने काजल से पहले बहस की. फिर गला पकड़कर जमीन पर गिरा दिया और पेट पर चाकू से हमला कर दिया. उसने मह‍िला पर बेदर्दी से हमला क‍िया और उसके प्राइवेट पार्ट को भी जख्मी कर द‍िया. वह मदद के ल‍िए च‍िल्ला रही थी लेक‍िन वहां कोई मददगार सामने नहीं आ पाया.

आरोपी हमला कर रहा था तब पड़ोसी महिला ने देखा

काजल मूल रूप से सांवेर की रहने वाली थी. वह 20 दिन पहले ही आरोपी का मोहल्ला छोड़कर यहां रहने आई थी.  काजल मकान की दूसरी मंजिल पर रहती थी. आरोपी हमला कर रहा था तब पड़ोसी महिला ने देख लिया. आरोपी उसे भी मारने दौड़ा तो महिला ने दूसरे के घर में भागकर जान बचाई. लसूड़िया पुलिस ने केस दर्ज कर देर रात आरोपी को हिरासत में ले लिया.

2007-2008 कॉमनवेल्थ बैंक सीरीज में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी वाली टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन किया था. इस टूर्नमेंट में गौतम गंभीर ने 440 रन बनाए थे जबकि सचिन तेंदुलकर ने 399 रन बनाए. भारत के लिए ईशांत शर्मा ने 14 इरफान पठान ने 11 और प्रवीण कुमार ने 10 विकेट हासिल किए. इस ट्राई सीरीज के पहले और दूसरे फाइनल में सचिन तेंदुलकर ने क्रमश: 117 और 91 रनों की पारी खेली. तब सचिन ने ऑस्ट्रेलियाई धरती पर अपना पहला वनडे शतक जमाया था. भारत ने दूसरा फाइनल जीतकर ट्रॉफी अपने नाम की.

अब विराट के पास इतिहास रचने का मौका

आपको बता दें कि टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला 12 जनवरी को सिडनी में खेलेगी. सीरीज का दूसरा वनडे एडिलेड में 15 जनवरी को खेला जाएगा और आखिरी वनडे 18 जनवरी को मेलबर्न में खेला जाएगा. टेस्ट में कंगारुओं को पीटने वाली विराट ब्रिगेड के पास वनडे सीरीज जीतकर इतिहास रचने का मौका है. विराट कोहली अगर टीम इंडिया को वनडे सीरीज में भी जीत दिलाते हैं तो वह भारत के पहले ऐसे कप्तान बन जाएंगे जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया की धरती पर एक ही दौरे में टेस्ट और बाइलैटरल (द्विपक्षीय) वनडे सीरीज में जीत दर्ज की होगी. सिडनी में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यहां 16 वनडे मुकाबले हुए हैं. इनमें से ऑस्ट्रेलिया ने 13 मैच जीते हैं, जबकि भारत सिर्फ दो मैच जीत सका है. जबकि एक मैच रद्द हो गया था.

Thursday, January 3, 2019

आज भारत में Xiaomi लॉन्च कर रहा है एंटी पल्यूशन मास्क, ये होगा खास

चीनी टेक कंपनी शाओमी 3 जनवरी को भारत में पल्यूशन मास्क लॉन्च करने की तैयारी में है. इससे पहले शाओमी ने एयर प्यूरिफायर लॉन्च किए हैं. हालांकि अब तक कंपनी ने अब तक ये साफ नहीं किया है कि वो कौन सा मास्क होगा. कंपनी की तरफ से एक ट्वीट किया गया है जिसमें मास्क देखा जा सकता है.

दिल्ली सहित पूरे भारत में ठंढ के मौसम में एयर पल्यूशन बढ़ जाता है और PM (Particulate Matter)  का लेवल काफी बढ़ा हुआ है. ऐसे में बाहर सांस लेना खतरनाक माना जाता है. इससे बचने के लिए डॉक्टर्स पल्यूशन मास्क लगाने को कहते हैं, ताकि कुछ राहत मिले.

शाओमी चीन में पहले से एंटी फॉग और एंटी पल्यूशन मास्क बेचता है और इसकी कई कैटगरीज हैं. उम्मीद है कंपनी बिल्ट इन एयर फिल्टर वाला मास्क लॉन्च करेगी जिसे चीन में 2016 में लॉन्च किया गया था. इसमें हाई फाइबर टेक्स्टाइल का यूज किया गया है और यह हल्का है. इसकी बिक्री ग्रे कलर में होती है और इसमें एक साइड में एयर फिल्टर लगा हुआ है.

इसके एयर फिल्टर को रिचार्ज कर सकते हैं और इसमें पॉलिमर लिथियम आयन बैटरी लगी है. फुल चार्ज करने में 3 से 4 घंटे लगते हैं. कंपनी का दावा है कि यह 99 फीसदी तक PM 2.5 फिल्टरेशन इफिशिएंसी देता है. भारत में ये मास्क लॉन्च होता है या नहीं ये तो कुछ घंटों में ही पता चलेगा.

इस मास्क की कीमत की बात करें तो दो साल पहले चीन में 89 युआन (लगभग 900 रुपये) में लॉन्च किया गया था. अगर भारत में ये मास्क लॉन्च होता है तो मुमकिन है इसकी कीमत 1000 रुपये तक होगा. 

क्या नए साल में आपका डेबिट या क्रेडिट कार्ड काम नहीं कर रहा? ये है वजह

नए साल की शुरुआत हो गई है और कुछ नए नियम भी लागू हो गए हैं. ऐसे में अगर नया साल लगते ही यानी 1 जनवरी 2019 से आपका डेबिट कार्ड/क्रेडिट कार्ड काम नहीं कर रहा, तो इसकी वजह हम आपको यहां बता रहे हैं. RBI के नए नियम के मुताबिक ऐसे डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड जिनमें मैग्नेटिक स्ट्रीप (मैगस्ट्रिप) का इस्तेमाल किया गया है, उनकी वैलिडिटी खत्म हो गई है और ऐसे कार्ड्स ब्लॉक कर दिए गए हैं.

इन स्मार्टफोन्स पर मिल रही बंपर छूट

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेजन पर एक स्मार्टफोन सेल का आयोजन किया गया है. इस सेल का नाम वीवो कार्निवल है. इस सेल की शुरुआत 2 जनवरी से हुई और यह 4 जनवरी तक जारी रहेगी. इस दौरान ग्राहक कुल 11,400 रुपये तक की छूट का फायदा उठा सकते हैं. साथ ही यहां 9,000 रुपये तक एक्सचेंज डिस्काउंट का फायदा भी ग्राहकों को मिलेगा. सेल के दौरान HDFC बैंक डेबिट और क्रेडिट कार्ड के जरिए EMI ट्रांजैक्शन करने वाले ग्राहकों को 5 प्रतिशत और 10 प्रतिशत की छूट भी मिलेगी.