Friday, December 21, 2018

डब्ल्यू वी रमन ने कोच की रेस में गैरी कर्स्टन, वेंकटेश प्रसाद को कैसे पछाड़ा?

भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज़ डब्ल्यू वी रमन को भारतीय महिला क्रिकेट टीम का कोच बनाया गया है. इस दौड़ में उन्होंने दक्षिण अफ़्रीका के गैरी कर्स्टन को पीछे छोड़ा.

कमाल की बात है कि गैरी कर्स्टन बीसीसीआई की तदर्थ चयन समिति की पहली पसंद थे.

चयन समिति में भारत के पूर्व कप्तान कपिल देव, पूर्व सलामी बल्लेबाज़ अंशुमान गायकवाड़ और महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान शांता रंगास्वामी शामिल थीं.

इससे पहले भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में शायद ही कोई इतनी हाई प्रोफ़ाइल चयन समिति बनी है.

भारतीय महिला क्रिकेट टीम का कोच बनाने के लिए काफ़ी माथापच्ची के बाद तीन नाम तय किये गए. इसमें गैरी कर्स्टन, भारत के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ वेंकटेश प्रसाद और डब्ल्यू वी रमन के नाम शामिल थे.

और कौन था इस रेस में?

करीब 28 क्रिकेटर्स ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम का कोच बनने के लिए आवेदन किया था.

इनमें भारत के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ मनोज प्रभाकर, ट्रेंट जॉनसन (आयरलैंड), पाकिस्तान की महिला क्रिकेट टीम के कोच मार्क कोल्स, इंग्लैंड के दिमित्री मैस्करेनहास, ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर और श्रीलंका के पूर्व कोच डेव व्हाटमोर, इंग्लैंड के ओवैस शाह, दक्षिण अफ्रीका के हर्शेल गिब्स, ऑस्ट्रेलिया के कोलिन मिलर और ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज़ डोमिनिक थोर्नले जैसे नाम शामिल थे.

डब्ल्यू वी रमन ने सलामी बल्लेबाज़ के तौर पर भारत के लिए 11 टेस्ट मैचों में चार अर्धशतकों की मदद से 448 रन बनाए हैं. टेस्ट क्रिकेट में उनका सर्वोच्च स्कोर 94 रन रहा.

एकदिवसीय क्रिकेट में उन्होंने भारत के लिए 27 मैचों में एक शतक और तीन अर्धशतक की मदद से 617 रन बनाए.

मिताली से कोच रमेश पोवार का विवाद
भारतीय महिला क्रिकेट में कोच का मुद्दा तब गरमाया जब शानदार फॉर्म में चल रही मिताली राज को पिछले दिनों वेस्ट इंडीज़ में खेले गए महिला विश्व टी-20 टूर्नामेंट के सेमीफ़ाइनल से बाहर किया गया.

सेमीफ़ाइनल में भारतीय टीम इंग्लैंड से बुरी तरह आठ विकेट से हार गई.

मिताली राज ने इससे पहले ग्रुप मैच में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ 56 और आयरलैंड के ख़िलाफ़ 51 रन बनाए थे.

इसके बाद उन्हें न तो ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ ग्रुप मैच में और न ही सेमीफ़ाइनल में टीम में जगह दी गई.

बस इसके बाद मिताली राज ने कोच रमेश पोवार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया.

उन्होंने कोच रमेश पोवार पर पक्षपात का आरोप लगाया और उनके सम्मान को ठेस पहुंचाने की शिकायत भी बीसीसीआई से की.

जवाब में भारतीय महिला टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर टीम के कोच रमेश पोवार के समर्थन में खुलकर आई, लेकिन मामला इतना तूल पकड़ गया कि रमेश पोवार को कार्यकाल पूरा होने के बाद कोच के पद से हटना पड़ा.

मिताली राज के साथ भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर भी यह कहकर साथ हो गए कि क्या ऐसा भारतीय पुरुष टीम के कप्तान विराट कोहली के साथ किया जा सकता है.

Thursday, December 6, 2018

सिद्धू को बीमारी के कारण बोलने में समस्या

अख़बार के मुताबिक़ पंजाब सरकार ने गुरुवार को विज्ञप्ति जारी कर यह जानकारी दी. सिद्धू गले में समस्या से जूझ रहे हैं.

इसी अख़बार की एक अन्य ख़बर के अनुसार दिल्ली में हर रोज प्रदूषण से 34 मौतें हो रही हैं.

अख़बार के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारियों से देश की राजधानी दिल्ली में पिछले साल 12,322 लोगों की मौत हुई, यानी रोजाना क़रीब 34 लोगों ने जान गंवाई.

लोकसभा चुनावों को लेकर फ़ेसबुक की गाइडलाइन

फ़ेसबुक ने कहा है कि उनके सोशल प्लेटफॉर्म पर राजनीतिक प्रचार करने के इच्छुक भारतीय विज्ञापनदाताओं को अपनी पहचान और जगह की पुष्टि करानी होगी ताकि इस माध्यम का किसी भी प्रकार से दुरुपयोग न हो.

फ़ेसबुक का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब देश साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों की तैयारी कर रहा है.

फ़ेसबुक की ओर से दिए गए एक बयान में कहा गया है कि विज्ञापनों में पारदर्शिता लाकर हम भारत में होने वाले चुनावों में किसी भी तरह के विदेशी हस्तक्षेप को रोक सकेंगे.

बीजेपी की पूर्व सांसद ने पार्टी पर लगाया नफ़रत फैलाने का आरोप

इंडियन एक्सप्रेस अख़बार बीजेपी सांसद सावित्री बाई फुले के पार्टी छोड़ने की ख़बर को प्रमुखता दी है. सावित्री का कहना है कि पार्टी नफ़रत फैला रही है इसलिए उन्होंने ये फ़ैसला लिया.

यूपी के बहराइच से बीजेपी सांसद फुले ने कहा कि वो वह पार्टी की नीतियों से असंतुष्ट हैं. फुले ने कहा कि बीजेपी समाज को बांटने की कोशिश कर रही है.

Monday, December 3, 2018

बुलंदशहर की हिंसा पर अब तक चुप योगी आदित्यनाथ: आज की पांच बड़ी ख़बरें

ये हिंसा तब भड़की जब स्थानीय हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने इलाके में कथित गोहत्या के नाम पर प्रदर्शन कर रहे थे. पुलिस के साथ उनकी झड़प हुई जिसमें पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की मौत हो गई.

इस हिंसा पर अब तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से कोई बयान नहीं आया है.

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस कुरियन जोसेफ़ ने आरोप लगाया था कि उन लोगों को जब ये लगा था कि भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर जजों को सुनवाई के लिए मामले देने का नियंत्रण बाहर से किया जा रहा है, तब वे लोग प्रेस कांफ्रेंस में एक साथ आए थे.

उनके इस आरोप के बाद लगातार बयान आ रहे हैं. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत के एक मुख्य न्यायाधीश के मुताबिक कुरियन को अपने आरोपों के पक्ष में सबूत रखना चाहिए था क्योंकि उनके आरोप बेहद गंभीर हैं. भारत के पूर्व सालिस्टर जनरल मोहन पारासरन का भी यही कहना है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भारतीय जनता पार्टी से सवाल किया कि जब गुजरात में सरदार पटेल की मूर्ति बन सकती है तो अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए कानून पारित क्यों नहीं हो सकता.

आरएसएस के वरिष्ठ नेता दत्तात्रेय होसबाले मुंबई में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे, उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक अलग पीठ का गठन किया है, जो अयोध्या में जमीन के मालिकाना हक मामले की सुनवाई कर रही है. लेकिन इस लंबित मुद्दे पर अब तक कोई फ़ैसला नहीं किया गया है.

होसबले ने कहा, ''अगर गुजरात में नर्मदा नदी के तट पर सरदार पटेल की प्रतिमा बन सकती है तो भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए कोई कानून पारित क्यों नहीं हो सकता?''

एनजीटी ने बीते सोमवार को आदेश दिया कि ये जुर्माना दिल्ली सरकार के अधिकारियों के वेतन और प्रदूषण फैलाने वालों से वसूला जाए. साथ ही दिल्ली सरकार इस संबंध में परफॉर्मेंस गारंटी रिपोर्ट दाखिल करे, ताकि जुर्माने के संबंध में कोई लापरवाही ना बरती जाए.

कब-कब हुई एनजीटी के आदेशों की अनदेखी?
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदेश कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि शहर में वायु प्रदूषण को काबू करने में नाकाम रहने पर दिल्ली सरकार केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जुर्माना दे. प्राधिकरण के स्पष्ट आदेशों के बावजूद इन्हें पूरा करने के लिए शायद ही कोई क़दम उठाया गया. अधिकारियों की नाक के नीचे कानून तोड़ा जाता रहा और लगातार प्रदूषण बढ़ता रहा.