Monday, December 3, 2018

बुलंदशहर की हिंसा पर अब तक चुप योगी आदित्यनाथ: आज की पांच बड़ी ख़बरें

ये हिंसा तब भड़की जब स्थानीय हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने इलाके में कथित गोहत्या के नाम पर प्रदर्शन कर रहे थे. पुलिस के साथ उनकी झड़प हुई जिसमें पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की मौत हो गई.

इस हिंसा पर अब तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से कोई बयान नहीं आया है.

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस कुरियन जोसेफ़ ने आरोप लगाया था कि उन लोगों को जब ये लगा था कि भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर जजों को सुनवाई के लिए मामले देने का नियंत्रण बाहर से किया जा रहा है, तब वे लोग प्रेस कांफ्रेंस में एक साथ आए थे.

उनके इस आरोप के बाद लगातार बयान आ रहे हैं. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत के एक मुख्य न्यायाधीश के मुताबिक कुरियन को अपने आरोपों के पक्ष में सबूत रखना चाहिए था क्योंकि उनके आरोप बेहद गंभीर हैं. भारत के पूर्व सालिस्टर जनरल मोहन पारासरन का भी यही कहना है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भारतीय जनता पार्टी से सवाल किया कि जब गुजरात में सरदार पटेल की मूर्ति बन सकती है तो अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए कानून पारित क्यों नहीं हो सकता.

आरएसएस के वरिष्ठ नेता दत्तात्रेय होसबाले मुंबई में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे, उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक अलग पीठ का गठन किया है, जो अयोध्या में जमीन के मालिकाना हक मामले की सुनवाई कर रही है. लेकिन इस लंबित मुद्दे पर अब तक कोई फ़ैसला नहीं किया गया है.

होसबले ने कहा, ''अगर गुजरात में नर्मदा नदी के तट पर सरदार पटेल की प्रतिमा बन सकती है तो भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए कोई कानून पारित क्यों नहीं हो सकता?''

एनजीटी ने बीते सोमवार को आदेश दिया कि ये जुर्माना दिल्ली सरकार के अधिकारियों के वेतन और प्रदूषण फैलाने वालों से वसूला जाए. साथ ही दिल्ली सरकार इस संबंध में परफॉर्मेंस गारंटी रिपोर्ट दाखिल करे, ताकि जुर्माने के संबंध में कोई लापरवाही ना बरती जाए.

कब-कब हुई एनजीटी के आदेशों की अनदेखी?
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदेश कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि शहर में वायु प्रदूषण को काबू करने में नाकाम रहने पर दिल्ली सरकार केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जुर्माना दे. प्राधिकरण के स्पष्ट आदेशों के बावजूद इन्हें पूरा करने के लिए शायद ही कोई क़दम उठाया गया. अधिकारियों की नाक के नीचे कानून तोड़ा जाता रहा और लगातार प्रदूषण बढ़ता रहा.

No comments:

Post a Comment